नई दिल्ली। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से मौद्रिक नीति समिति (RBI Monetary Policy) की घोषण की गई। आरबीआई ने एक बार फिर से महंगाई प काबू पाने के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के अनुमान को बरकरार रखा है और भारत की आर्थिक वृद्धि दर को कम दर दिया है। इस संदर्भ में आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा कि भू-राजनीतिक संकट की वजह से उत्पन्न हुई चुनौतियों से और ग्लोबल स्तर पर तंग होती वित्तीय स्थिति की वजह से आर्थिक वृद्धि दर के नीचे आने का रिस्क है।
महंगाई पर आरबीआई का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपने मुद्रास्फीति के अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिये मुद्रास्फीति अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। दूसरी छमाही में इसके करीब छह प्रतिशत रहने का अनुमान है। दास ने कहा कि तीसरी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 6.5 प्रतिशत और मार्च तिमाही के लिए 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि अगर तेल के दाम में मौजूदा नरमी आगे बनी रही, तो महंगाई से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति सात प्रतिशत थी, जो आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ऊपर है। केंद्रीय बैंक को जिम्मेदारी दी गई है कि वह मुद्रास्फीति को 2-6 प्रतिशत के बीच रखे। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई दर पांच फीसदी रहने का अनुमान है।
GDP वृद्धि दर का घटा अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिये आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई ने दुनिया के विभिन्न देशों में मौद्रिक नीति को आक्रामक रूप से कड़ा किये जाने और मांग में नरमी का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। चालू वित्त वर्ष की पांचवीं मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक देश को सतत वृद्धि के रास्ते पर रखने को लेकर कीमत स्थिरता के लिये प्रतिबद्ध है।
चालू वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी यानी स्थिर मूल्यों पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 13.5 प्रतिशत रही थी। दास ने हालांकि अगाह किया, 'हम कोविड महामारी संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के नीतिगत दर में आक्रामक वृद्धि के कारण उत्पन्न नये तूफान' का सामना कर रहे हैं।' उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बैंक ने इस साल अप्रैल में 2022-23 के लिये जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत किया था।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
