Canara Bank Rajesh Exports Dispute Case : बाजार नियामक सेबी की तरफ से रेवेन्यू ओवरस्टेटमेंट मामले में जांच और कार्रवाई का सामना कर रही राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) अब एक और विवाद में घिर गई है। यह मामला सरकारी क्षेत्र के केनरा बैंक (Canara Bank) के साथ ₹509 करोड़ के लेटर ऑफ क्रेडिट (लोन) से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में यह भुगतान का एक आम जरिया होता है।
विदेश से गोल्ड आयात करने के लिए राजेश एक्सपोर्ट्स की तरफ से अक्सर केनरा बैंक से 'लेटर ऑफ क्रेडिट' (LC) जारी कराया जाता था। असल में इस व्यवस्था के तहत जब विदेशी सप्लायर की तरफ से कंपनी के नाम पर गोल्ड शिपिंग के दस्तावेज दिखाए जाते, तो बैंक इसके लिए भुगतान कर देता, बाद में राजेश एक्सपोर्ट्स की तरफ से यह पैसा बैंक को चुका दिया जाता।
विवाद की वजह राजेश एक्सपोर्ट की तरफ से अपनी ही कंपनी को होने वाले भुगतान को लेकर है। केनरा बैंक की तरफ से जिन विदेशी सप्लायर्स को भुगतान किया जा रहा था उनमें से ज्यादातर भुगतान वाल्काम्बी एसए (Valcambi SA) नाम की कंपनी को किया जा रहा था। यह कंपनी स्विट्जरलैंड की एक बड़ी गोल्ड रिफाइनरी है और राजेश एक्सपोर्ट्स की ही एक 'स्टेप-डाउन सब्सिडियरी' है।
क्यों हुआ विवाद
कई सालों तक यह सिस्टम चलता रहा। केनरा बैंक भारत से पैसा रिलीज करता, जो राजेश एक्सपोर्ट्स की ही विदेशी कंपनी के खाते में जाता। लेकिन, 2020 में जब कई एलसी (LC) के भुगतान की तारीख आई, तो राजेश एक्सपोर्ट्स ने केनरा बैंक को पैसा नहीं लौटाया। नतीजा यह हुआ कि विदेशी कंपनी को पैसा मिल गया, लेकिन केनरा बैंक का ₹509 करोड़ डूबने की कगार पर पहुंच गया। केनरा बैंक ने राजेश एक्सपोर्ट को जारी किए गए इस ₹509 करोड़ के बकाए को Stressed Asset घोषित कर दिया है और इसकी वसूली के लिए इस एसेट को बेचने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वहीं, राजेश एक्सपोर्ट्स ने बैंक के दावों को खारिज किया है।
क्या है कंपनी की दलील?
कंपनी का कहना है कि यह कोई पारंपरिक लोन डिफॉल्ट नहीं है। नुकसान मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव (Foreign Exchange Movements) और बैंक की तरफ से फॉरेक्स ट्रांजैक्शन को ठीक से नहीं संभालने के कारण हुआ है। कंपनी का दावा है कि यह पूरी व्यवस्था कैश मार्जिन से सिक्योर की गई थी। इस विवाद के बाद भी राजेश एक्सपोर्ट्स खुद को 'कर्जमुक्त' (Debt-Free) कंपनी बताती रही है।
DRT ने दिया झटका
ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) ने इस मामले में राजेश एक्सपोर्ट झटका देते हुए कंपनी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल का कहना है कि 'लेटर ऑफ क्रेडिट' (LC) के तहत पैदा होने वाली वित्तीय जिम्मेदारियां बाध्यकारी होती हैं और कंपनी को हर हाल में बैंक का पैसा चुकाना होगा। वहीं, केनरा बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसने इस डूबते कर्ज के लिए पहले ही जरूरी प्रावधान (Provisions) कर लिए हैं, इसलिए बैंक की वित्तीय सेहत पर इसका कोई बड़ा तात्कालिक असर नहीं पड़ेगा।
