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पोस्ट ऑफिस स्कीम्स: जानिए कब कटेगा TDS और कब मिलेगा टैक्स छूट

Post Office Schemes TDS: पोस्ट ऑफिस लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म निवेश विकल्प प्रदान करता है, लेकिन सभी पर टैक्स लाभ नहीं मिलते। कुछ योजनाओं के ब्याज पर टैक्स लगता है और वे सेक्शन 80C के तहत कटौती योग्य नहीं होतीं। TDS केवल उस राशि पर कटता है जो निर्धारित सीमा से अधिक हो।

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पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर टैक्स कटौती और फायदे क्या हैं? (तस्वीर-istock)

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Post Office Schemes TDS : पोस्ट ऑफिस लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म, दोनों तरह के निवेश के लिए कई विकल्प देता है। हालांकि, इनमें से सभी टैक्स लाभ के साथ नहीं आते हैं। हालांकि कुछ पोस्ट ऑफिस स्कीम्स पर अर्जित ब्याज टैक्स योग्य होता है। इन योजनाओं में निवेश इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80C के तहत कटौती के लिए योग्य नहीं हो सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि स्रोत पर टैक्स कटौती (TDS) उन ट्रांजैक्शन पर काटा जाता है जब भुगतान का वैल्यू सीमा से अधिक हो जाता है। पूर्व निर्धारित सीमा से कम राशि पर टीडीएस लागू नहीं होता है।

टीडीएस क्या है?

TDS यानी Tax Deducted at Source एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जब कोई व्यक्ति (जैसे बैंक या पोस्ट ऑफिस) किसी को कुछ भुगतान करता है (जैसे ब्याज), तो वह भुगतान करते समय ही तय दर से टैक्स काट लेता है और सरकार को जमा कर देता है। जिस व्यक्ति का TDS कटा है, उसे इसका क्रेडिट Form 26AS या TDS Certificate के जरिए इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय मिल जाता है। वह फॉर्म 26AS या कटौतीकर्ता द्वारा जारी किए गए टीडीएस प्रमाणपत्र के आधार पर कटौती की गई राशि का क्रेडिट पाने का हकदार होगा।

1 अप्रैल 2025 से TDS सीमा बढ़ाई गई

बजट 2025 में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीमा दोगुनी कर दी गई है। 1 अप्रैल 2025 से, सावधि जमा (FD), आवर्ती जमा (RD) आदि से ब्याज आय केवल तभी कटौती के अधीन होगी जब बैंक या पोस्ट ऑफिस में कुल मिलाकर राशि वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक हो। इसका मतलब है कि अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की ब्याज आय एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से कम है, तो बैंक कोई TDS नहीं काटेगा। आम नागरिकों के लिए सरकार ने ब्याज आय पर TDS की सीमा 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी है, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगी। यहां विभिन्न पोस्ट ऑफिस लघु बचत योजनाओं के बारे में बताया गया है, जिनमें वे योजनाएं भी शामिल हैं जिनमें स्रोत पर टैक्स कटौती (TDS) की जाती है।

Public Provident Fund (PPF)

Public Provident Fund (PPF) निवेश पर अर्जित ब्याज पूरी तरह से टैक्स-मुक्त होने के कारण TDS नहीं काटा जाता है यानी इस पर TDS नहीं लगता और ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। ₹1.5 लाख तक की निवेश राशि पर Section 80C के तहत छूट मिलती है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना ((SCSS)

एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक अर्जित ब्याज पर TDS काटा जाएगा। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) के अंतर्गत, एक वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 80C के अंतर्गत टैक्स लाभ उपलब्ध हैं।

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में कोई TDS कटौती नहीं होती है। यह योजना Exempt-Exempt-Exempt (EEE) कैटेगरी में आती है। निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री हैं।

राष्ट्रीय बचत आवर्ती जमा खाता (RD)

पोस्ट ऑफिस आपके आवर्ती जमा निवेश पर अर्जित ब्याज से स्रोत पर टैक्स काटेगा। अगर राशि सीमा से कम है, तो पोस्ट ऑफिस में जमा की गई आवर्ती जमा राशि से कोई टैक्स नहीं काटा जाएगा।

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC)

फिक्स्ड डिपॉजिट के विपरीत, NSC में अर्जित ब्याज पर TDS लागू नहीं होता है। एक वित्तीय वर्ष में NSC में 1.5 लाख रुपये तक की जमा राशि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के अंतर्गत टैक्स लाभ के लिए पात्र है।

किसान विकास पत्र (KVP)

किसान विकास पत्र (KVP) सेक्शन 80C के तहत कटौती के लिए योग्य नहीं है। साथ ही, KVP पर सालाना अर्जित ब्याज टैक्स योग्य है। हालांकि, योजना की मैच्योरिटी के बाद की गई निकासी पर स्रोत पर टैक्स कटौती (TDS) नहीं लगती है।

पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)

पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में अर्जित ब्याज पर TDS लागू होता है, सिवाय 5-वर्षीय पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट के, जो सेक्शन 80C के तहत कटौती के लिए योग्य है। हालांकि अगर कुल ब्याज आय (1-वर्ष, 2-वर्ष या 3-वर्ष से) सीमा से अधिक हो जाती है, तो TDS काटा जाएगा।

मासिक आय योजना (MIS)

पोस्ट ऑफिसमासिक आय योजना (MIS) से अर्जित ब्याज पूरी तरह से टैक्स योग्य है। अगर कुल वार्षिक ब्याज भुगतान सीमा (सामान्य नागरिकों के लिए 50,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपये) से अधिक है, तो पोस्ट ऑफिस द्वारा TDS काटा जाएगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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