PMGSY: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दूरदराज के क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा ओडिशा में ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 620.63 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY-3) के तहत मणिपुर, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 474.71 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
पूर्वोत्तर में बेहतर होंगी ग्रामीण सड़कें
मणिपुर के लिए 225.15 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 280.97 किलोमीटर लंबी 41 सड़कों को मंजूरी दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि इससे पहले राज्य में PMGSY-3 के तहत 404.72 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 502.24 किलोमीटर लंबी 56 सड़कों के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। मिजोरम में 373.46 मीटर लंबे सात पुलों के निर्माण के लिए 67.69 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश को मंजूरी दी गई है।
हिमाचल और उत्तराखंड को क्या मिला
इससे पहले, PMGSY-3 के तहत राज्य में 562.70 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 487.50 किलोमीटर लंबी 17 सड़कों को मंजूरी दी गई थी। हिमाचल प्रदेश को 970.772 मीटर लंबे 21 पुलों के निर्माण के लिए इस योजना के तहत 140.90 करोड़ रुपये मिलेंगे। इससे पहले PMGSY-3 के तहत राज्य के लिए कुल 3,123.117 किलोमीटर की लंबाई वाली 299 सड़कों और 43 लंबे पुलों के लिए 3,345.82 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश को मंजूरी मिली थी। उत्तराखंड को 246 मीटर लंबे नौ पुलों के निर्माण के लिए 40.77 करोड़ रुपये का निवेश मिलेगा। योजना के तहत राज्य को पहले ही 2,287.95 किलोमीटर लंबी 212 सड़कों और नौ पुलों के लिए 1,865.34 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश को मंजूरी दी जा चुकी है।
त्रिपुरा और ओडिशा को क्या मिला?
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के कनेक्टिविटी घटक के तहत त्रिपुरा और ओडिशा के लिए भी परियोजनाएं मंजूर की हैं। ओडिशा के लिए 76.47 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ कुल 84.352 किलोमीटर की लंबाई वाली 25 सड़कें मंजूर की गई हैं, जबकि त्रिपुरा के लिए 69.65 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ 63.271 किलोमीटर लंबी 26 सड़कें और दो पुलों को मंजूरी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बाजारों जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में सुधार करना है। मंत्रालय ने बताया कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी, दूरदराज के गांवों और शहरी केंद्रों के बीच की खाई को पाटा जा सकेगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा।
