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PM मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की Melody टॉफी, क्यों बनी खास, कैसे डिप्लोमैसी में बनाई जगह?

डिप्लोमैटिक दौरों पर महंगे गिफ्ट चर्चा बनते हैं। लेकिन, पीएम मोदी ने इटली की पीएम को Melody टॉफी का पैकेट भेंट किया। आखिर में इसमें ऐसा क्या खास है कि बच्चों की टॉफी डिप्लोमैसी के केंद्र में आ गई।

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पीएम मोदी के अनोखे गिफ्ट से खुश हुईं पीएम मेलोनी

Modi Gifted Melody To PM Meloni : इटली के द्विपक्षीय दौरे पर रोम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 मई को इटली की प्रधामंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिले। इस दौरान PM Modi ने Giorgia Meloni मेलोनी को 1 रुपये की चॉकलेटी टॉफी Melody का पैकेट भेंट किया। पीएम मोदी के इस तोहफे को इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने खुल सोशल मीडिया पर साझा किया और पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया।

कौनसी कंपनी बनाती है मलोडी?

Melody टॉफी असल में भारतीय कंपनी Parle Products बनाती है। देश की आजादी से पहले बनी यह कंपनी असल में भारत के स्वदेशी आंदोलन से भी जुड़ी रही है और दुनिया में सबसे ज्यादा बिस्किट, टॉफी जैसे उत्पाद बेचने वाली कंपनियों में शामिल है। हालांकि, यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। लेकिन, एक अनुमान के मुताबिक इसका वैल्यूएशन 8 से 10 अरब डॉलर यानी 80 से 90 हजार करोड़ रुपये के बीच है।

कौन है कंपनी का मालिक?

फिलहाल विजय चौहान और उनके परिवार के पास कंपनी का स्वामित्व है। कंपनी की शुरुआत मोहनलाल दयाल चौहान ने 1929 में मुंबई के विले पार्ले इलाके में की थी। पारिवारिक बंटवारे के बाद, पारले समूह की अन्य कंपनियों का मालिकाना हक परिवार के अलग-अलग सदस्यों के पास है। मसलन, पारले एग्रो Parle Agro ब्रांड के तहत आने वाले फ्रूटी और ऐपी को प्रकाश चौहान और उनकी बेटियां शौना, अलीशा और नादिया, चलाते हैं। वहीं, बिसलेरी इंटरनेशनल (Bisleri International) को रमेश चौहान चलाते हैंं।

Melodi की कहानी में क्यों खास बनी टॉफी?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम मेलोनी के बीच गर्मजोशी भरा कनेक्शन है। अक्सर, जब दोनों नेताओं की मुलाकात होती है, तो सोशल मीडिया पर Melodi टर्म चर्चा में आ जाता है। Meloni के शुरुआती चार अक्षर और Modi के आखिरी दो अक्षरों से बना शब्द Melodi असल में अंग्रेजी शब्द Melody जैसा आभास देता है, जिसका अर्थ मधुरता होता है। दोनों नेताओं के मधुर रिश्तों को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा होती है और दोनों नेता भी इसका आनंद लेते हैं। यही वजह है गंभीर डिप्लोमैटिक चर्चा के बीच Melody टॉफी जगह बना पाई, जो कि असल में मीठे चॉकलेटी स्वाद के लिए फेमस है।

कई पीढ़ियों के बचपन का हिस्सा Melody

पारले ने 1983 मेलोडी टॉफी लॉन्च की थी। इसे सीधे तौर पर कैडबरी जैसे बड़े प्लेयर्स से टक्कर लेनी थी। लेकिन, इसके विज्ञापन ने इसे सबसे अलग बना दिया। "मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?" "मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ" यह दो लाइन का विज्ञापन कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। अब यह विज्ञापन कम कई पीढ़ियों के बचपन का हिस्सा ज्यादा हो गया है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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