Home Loan Tax Benefits: घर खरीदना अधिकतर लोगों का सबसे बड़ा सपना होता है। हालांकि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के कारण अधिकतर लोग होम लोन (Home Loan) का सहारा लेते हैं। लेकिन कई बार लोग केवल EMI देखकर लोन ले लेते हैं और बाद में ब्याज का बोझ काफी बढ़ जाता है। वहीं, अगर शुरुआत में सही योजना बनाई जाए तो Home Loan की कुल लागत कम की जा सकती है और टैक्स बचत का फायदा भी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे-

Home Loan (Photo: iStock)
सही Loan Tenure चुनें
सबसे पहले सही लोन टेन्योर (Loan Tenure) चुनना बेहद जरूरी माना जाता है। लंबी अवधि का लोन लेने पर EMI कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज काफी ज्यादा देना पड़ता है। वहीं छोटी अवधि में EMI अधिक रहती है, लेकिन ब्याज का बोझ कम होता है। इसलिए अपनी आय और खर्च को ध्यान में रखकर ऐसा टेन्योर चुनना चाहिए जो संतुलित हो।
अतिरिक्त रकम जमा करें
समय-समय पर अतिरिक्त रकम जमा करना भी काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे लोन प्रिंसिपल जल्दी कम होता है और कुल ब्याज का बोझ घट जाता है। Floating Rate Home Loan में ज्यादातर बैंक प्री-पेमेंट पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेते। बोनस, इंसेंटिव या अतिरिक्त बचत का इस्तेमाल कर लोन जल्दी कम किया जा सकता है।
टैक्स बेनिफिट्स का सही इस्तेमाल करें
इसके अलावा, टैक्स बेनिफिट्स का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। Home Loan के Principal Repayment पर Income Tax Act की Section 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है। वहीं Section 24(b) के तहत ब्याज भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का फायदा लिया जा सकता है। इससे कुल टैक्स बोझ काफी कम हो सकता है।
Joint Home Loan लेना फायदे का सौदा
अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो Joint Home Loan लेना भी फायदे का सौदा माना जाता है। इससे लोन एलिजिबिलिटी बढ़ जाती है और दोनों अलग-अलग टैक्स बेनिफिट्स क्लेम कर सकते हैं। हालांकि दोनों को Co-owner और Co-borrower होना जरूरी माना जाता है। अगर कोई संपत्ति संयुक्त नाम से खरीदी गई है और दोनों लोग सह-उधारकर्ता हैं, तो सेक्शन 24 और सेक्शन 26 के तहत प्रत्येक जॉइंट उधारकर्ता अलग-अलग 2 लाख रुपये तक ब्याज पर टैक्स कटौती का फायदा उठा सकता है।
क्रेडिट स्कोर रखें मजबूत
Home Loan लेने से पहले क्रेडिट स्कोर (Credit Score) मजबूत रखना चाहिए। अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक कम ब्याज दर पर लोन देने को तैयार हो सकते हैं। समय पर EMI और Credit Card भुगतान करने से Credit Profile बेहतर होती है।
रेपो रेट पर भी रखें नजर
इसके अलावा, Floating Interest Rate वाले लोन में ब्याज दर समय के साथ बदलती रहती है। इसलिए रेपो रेट और बैंक की ब्याज दरों पर नजर बनाए रखना जरूरी है। ब्याज दर कम होने पर EMI बढ़ाकर या Prepayment कर लोन जल्दी खत्म किया जा सकता है।
