मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भीषण तनाव और युद्ध की आग अब धीरे-धीरे पूरे एशिया को अपनी चपेट में ले रही है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सबसे भयानक असर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर देखने को मिल रहा है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति सप्लाई को तहस-नहस कर दिया है, जिसके कारण पाकिस्तान में एनर्जी क्राइसिस का असर दिखने लगा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि वहां ईंधन और रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत पैदा हो गई है और आम जनता का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। हालातों पर काबू पाने के लिए इस्लामाबाद में अगले 30 दिनों तक सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मुफ्त करने का बड़ा फैसला लिया गया है।
बता दें एनर्जी क्राइसिस के चलते पाकिस्तान ने कल यानी शुक्रवार को पेट्रोल डीजल की कीमतों में भारी इजाफा किया था लेकिन जनता के आक्रोश के आगे उसने शनिवार को ही 80 रुपए तक पेट्रोल डीजल की कीमतें घटा दी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट
पाकिस्तान के इस भीषण ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी वजह भौगोलिक और रणनीतिक है। दरअसल, पाकिस्तान अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों और तेल आपूर्ति का लगभग 85% हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते ही आयात करता है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल व्यापार की जीवन रेखा माना जाता है। वर्तमान युद्ध के दौरान ईरान द्वारा इस रास्ते पर की गई नाकाबंदी ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। तेल के टैंकर बीच रास्ते में फंसे हुए हैं, जिससे देश के भीतर ईंधन का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। इस नाकाबंदी ने न केवल पेट्रोल-डीजल, बल्कि एलपीजी की कीमतों को भी आसमान पर पहुँचा दिया है।
बढ़ती कीमतों ने भड़काया जनता का गुस्सा
पाकिस्तान सरकार ने वैश्विक बाजार और सप्लाई चेन में आई बाधाओं का हवाला देते हुए पिछले कुछ हफ्तों में ईंधन की कीमतों में कई बार इजाफा किया है। हाल ही में पेट्रोल के दामों में 42.7% की ऐतिहासिक वृद्धि की गई, जिसके बाद कीमतें 485 रुपये प्रति लीटर के पार पहुँच गईं। इस 'पेट्रोल बम' ने पाकिस्तानी आवाम के सब्र का बांध तोड़ दिया। रातों-रात हुई इस बढ़ोतरी के बाद देशभर के पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं और गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए। परिवहन की लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रधानमंत्री का 'डैमेज कंट्रोल' और नई कीमतें
जनता का भारी विरोध और सड़कों पर मचे बवाल को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। अपनी सत्ता और देश की कानून-व्यवस्था को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने आनन-फानन में राष्ट्र को संबोधित किया और पेट्रोल की कीमतों में भारी कटौती का ऐलान किया। सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली लेवी में कमी की, जिससे अब इसकी कीमत घटकर 378 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। प्रधानमंत्री ने वादा किया है कि आने वाले एक महीने तक इन कीमतों को स्थिर रखा जाएगा ताकि जनता को कुछ राहत मिल सके। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी राहत है, क्योंकि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता साफ नहीं होता, तब तक आपूर्ति बहाल होना मुश्किल है।
पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। एक तरफ देश का विदेशी मुद्रा भंडार खाली है, और दूसरी तरफ वैश्विक युद्ध के कारण आयात महंगा होता जा रहा है। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ और होर्मुज का रास्ता बंद रहा, तो पाकिस्तान को ईंधन की राशनिंग (सीमित सप्लाई) जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल, सरकार अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बेकाबू महंगाई ने जनता के मन में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
