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अगले तीन दिनों में भारत आएगी 61,000 टन से ज्यादा एलपीजी; होर्मुज में अभी कितने भारतीय जहाज फंसे, जानें आंकड़े

पश्चिम एशिया संकट के बीच दो भारतीय एलपीजी टैंकर सुरक्षित होर्मुज पार कर भारत आ रहे हैं, जबकि फारस की खाड़ी में 16 भारतीय जहाज अब भी फंसे हैं। अगले तीन दिनों में 61,000 टन से अधिक एलपीजी भारत पहुंचेगी, जिससे आपूर्ति दबाव घटेगा।

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सांकेतिक तस्वीर।

Photo : iStock

पश्चिम एशिया में जारी जंग और LPG संकट के बीच भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारतीय बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 16 मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। धीरे-धीरे एक के बाद एक ईरान इन जहाजों को निकलने दे रहा है।

होर्मुज पार कर भारत आने वाले जहाजों के बारे में बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 46,650 टन एलपीजी से लदा टैंकर 'ग्रीन सानवी'कल यानी सात अप्रैल को भारत पहुंचेगा।

वहीं, 15,500 टन गैस लेकर 'ग्रीन आशा'टैंकर नौ अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारतीय समुद्री परिचालन सुरक्षित और निर्बाध बना हुआ है। दो एलपीजी टैंकर इस जलडमरूमध्य से आगे बढ़ गए हैं जबकि 433नाविकों के साथ भारतीय ध्वज वाले 16 जहाज अभी उसी इलाके में हैं।

अब तक आठ एलपीजी टैंकर हो चुके हैं पार

अब तक भारतीय ध्वज वाले कुल आठ एलपीजी टैंकर इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। पिछले सप्ताह भी दो टैंकर- बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम करीब 94,000 टन गैस के साथ सुरक्षित ढंग से भारत पहुंचे थे।ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के साझा हमले शुरू होने के बाद से ही यह जलमार्ग लगभग बंद हो चुका है। यह जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है।

जानें किस जहाज में क्या लदा है

फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों में एक एलएनजी पोत, दो एलपीजी टैंकर, छह कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, तीन कंटेनर पोत, एक ड्रेजर,एक रसायन ले जाने वाला पोत और दो थोक मालवाहक शामिल हैं।

भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत आयात रसोई गैस आयात करता है

वरिष्ठ अधिकारी ने इस जलडमरूमध्य को पार करने के लिए ईरान द्वारा शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है। भारत रसोई गैस की अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है,जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में इन टैंकरो का आगमन देश में एलपीजी आपूर्ति पर दबाव को कम करने में मदद करेगा।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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