पश्चिम एशिया में जारी जंग और LPG संकट के बीच भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारतीय बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 16 मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। धीरे-धीरे एक के बाद एक ईरान इन जहाजों को निकलने दे रहा है।
होर्मुज पार कर भारत आने वाले जहाजों के बारे में बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 46,650 टन एलपीजी से लदा टैंकर 'ग्रीन सानवी'कल यानी सात अप्रैल को भारत पहुंचेगा।
वहीं, 15,500 टन गैस लेकर 'ग्रीन आशा'टैंकर नौ अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारतीय समुद्री परिचालन सुरक्षित और निर्बाध बना हुआ है। दो एलपीजी टैंकर इस जलडमरूमध्य से आगे बढ़ गए हैं जबकि 433नाविकों के साथ भारतीय ध्वज वाले 16 जहाज अभी उसी इलाके में हैं।
अब तक आठ एलपीजी टैंकर हो चुके हैं पार
अब तक भारतीय ध्वज वाले कुल आठ एलपीजी टैंकर इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। पिछले सप्ताह भी दो टैंकर- बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम करीब 94,000 टन गैस के साथ सुरक्षित ढंग से भारत पहुंचे थे।ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के साझा हमले शुरू होने के बाद से ही यह जलमार्ग लगभग बंद हो चुका है। यह जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है।
जानें किस जहाज में क्या लदा है
फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों में एक एलएनजी पोत, दो एलपीजी टैंकर, छह कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, तीन कंटेनर पोत, एक ड्रेजर,एक रसायन ले जाने वाला पोत और दो थोक मालवाहक शामिल हैं।भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत आयात रसोई गैस आयात करता है
वरिष्ठ अधिकारी ने इस जलडमरूमध्य को पार करने के लिए ईरान द्वारा शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है। भारत रसोई गैस की अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है,जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में इन टैंकरो का आगमन देश में एलपीजी आपूर्ति पर दबाव को कम करने में मदद करेगा।
