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Omnitech Engineering IPO: क्या कह रहा 64 P/E, शेयर महंगा या तेज ग्रोथ की संभावना?

हाई-प्रिसिजन इंडस्ट्रियल कंपोनेंट बनाने वाली Omnitech Engineering का IPO 25 से 27 फरवरी तक खुला है। कंपनी ने हाल के वर्षों में तेज ग्रोथ दिखाई है, लेकिन 64 गुना कमाई के वैल्यूएशन पर यह इश्यू निवेशकों के लिए आकर्षक है या महंगा दांव, यही बड़ा सवाल है।

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आमनीटेक आईपीओ का सब्सक्रिप्शन बंद

Omnitech Engineering के IPO का सब्सक्रिप्शन आज 27 फरवरी को बंद हो रहा है। इश्यू के सब्सक्रिप्शन को निवेशकों की तरफ से बेहद सुस्त प्रतिक्रिया मिली है। एम्प्लोयी कैटेगरी के अलावा इश्यू को किसी भी कैटेगरी में 100 फीसदी सब्सक्रिप्शन नहीं मिला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या महंगे वैल्यूएशन की वजह से निवेशक दूरी बना रहे हैं। हालांकि, कंपनी ने हाल के वर्षों में तेज ग्रोथ दिखाई है, लेकिन 64 गुना कमाई के वैल्यूएशन पर यह इश्यू निवेशकों के लिए आकर्षक है या महंगा दांव, यही बड़ा सवाल है।

बिजनेस मॉडल और बाजार

कंपनी सेफ्टी-क्रिटिकल इंडस्ट्रियल एप्लिकेशन के लिए हाई-प्रिसिजन मेटल पार्ट्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट 3 ग्राम से लेकर 500 किलोग्राम तक के होते हैं। ऊर्जा, मोशन कंट्रोल और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट इसके प्रमुख सेगमेंट हैं। पहली छमाही FY26 में करीब 79 प्रतिशत राजस्व एक्सपोर्ट से आया, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत रही

एनर्जी सेगमेंट बढ़ा रेवेन्यू

कंपनी का प्रदर्शन ग्लोबल कैपेक्स साइकिल से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा कंपनी आक्रामक कैपेक्स फेज में है। पिछले दो वर्षों में 218 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और IPO से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा राजकोट में नई यूनिट लगाने में खर्च होगा। इसके अलावा कंपनी को एनर्जी सेगमेंट से रेवेन्यू में 40% का उछाल देखने को मिला है। कंपनी का वित्त वर्ष 2025 में कुल रेवेन्यू 343 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 178 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। इसके अलावा नेट प्रॉफिट भी 44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। EBIT मार्जिन 23 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो ऑपरेटिंग दक्षता को दर्शाता है

बैलेंस शीट और जोखिम

तेज विस्तार का असर वर्किंग कैपिटल पर दिख रहा है। कार्यशील पूंजी चक्र FY23 के 139 दिनों से बढ़कर FY25 में 283 दिन हो गया। इससे कैश फ्लो पर दबाव पड़ा और कर्ज बढ़ा। FY25 में कुल कर्ज 361 करोड़ रुपये रहा। इसके अलावा, ऑर्डर बुक का 59 प्रतिशत हिस्सा एक ही ग्राहक से जुड़ा है। किसी बड़े ग्राहक की निर्भरता जोखिम को बढ़ाती है।

वैल्यूएशन का गणित

216 से 227 रुपये के प्राइस बैंड पर कंपनी का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप करीब 2,807 करोड़ रुपये और P/E अनुपात 64 बैठता है। यह मल्टीपल सस्ता नहीं कहा जा सकता, खासकर तब जब बिजनेस ऊर्जा और इंडस्ट्रियल साइकिल पर निर्भर हो। कंपनी के पास मजबूत एंट्री बैरियर है। 97 प्रतिशत रिपीट कस्टमर बेस और निर्यात आधारित ग्रोथ है। लेकिन ऊंचा वैल्यूएशन, बढ़ता कर्ज और साइक्लिकल जोखिम निवेश निर्णय को जटिल बनाते हैं। जो निवेशक लंबी अवधि और उच्च जोखिम क्षमता रखते हैं, वे विचार कर सकते हैं। हालांकि मौजूदा वैल्यूएशन पर मार्जिन ऑफ सेफ्टी सीमित नजर आता है, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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