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न गोल्ड, न सिल्वर! ईरान युद्ध के बीच ये एसेट बना सेफ हेवन, एक महीने में 10% रिटर्न

अब तक की धारणाओं के मुताबिक संकट के दौर में गोल्ड को निवेश का सेफ हेवन एसेट माना जाता रहा है। लेकिन, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दौरान यह धारणा ध्वस्त होती दिखी है। क्योंकि, इस दौरान गोल्ड या डॉलर नही, बल्कि बिटकॉइन सेफ हेवन साबित हुआ है।

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गोल्ड की तुलना में बिटकॉइन ने दिखाई मजबूती

Bitcoin vs Gold: ईरान संकट के चलते ग्लोबल बाजारों में उथल-पुथल के बीच निवेशकों ने पारंपरिक सेफ हेवन की ओर रुख किया, लेकिन इस बार तस्वीर अलग रही। गोल्ड और डॉलर के मुकाबले Bitcoin ने दोगुनी से ज्यादा तेजी दिखाकर बाजार को चौंका दिया। यह बदलाव निवेश रणनीति में बड़े शिफ्ट का संकेत देता है।

संकट में बदला बाजार का पैटर्न

ईरान संघर्ष के बाद ग्लोबल इक्विटी बाजारों में तेज गिरावट और अस्थिरता देखने को मिली। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक गोल्ड और अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं, लेकिन इस बार Bitcoin ने इस पारंपरिक पैटर्न को चुनौती दी। पिछले एक महीने में Bitcoin ने 10% से ज्यादा रिटर्न दिया, जो बाकी एसेट्स से काफी बेहतर है।

Bitcoin vs Gold

संकट के दौर में बिटकॉइन बना सेफ हेवन

गोल्ड और डॉलर क्यों रहे पीछे?

गोल्ड, जिसे संकट का सबसे भरोसेमंद एसेट माना जाता है, इस बार सीमित दायरे में ही रहा और करीब 2% के आसपास रिटर्न दे पाया। मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में कटौती की घटती उम्मीदों ने गोल्ड की तेजी को रोका। वहीं डॉलर में स्थिर मजबूती जरूर दिखी, लेकिन उसमें वह आक्रामक तेजी नहीं दिखी जो आमतौर पर बड़े संकट में देखने को मिलती है।

Bitcoin में क्यों आई इतनी तेजी?

Bitcoin की तेजी के पीछे कई फैक्टर काम कर रहे हैं। एक ओर संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है, जहां Bitcoin ETFs में लगातार इनफ्लो दर्ज हो रहा है। दूसरी ओर बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि क्रिप्टो अब सिर्फ हाई-रिस्क एसेट नहीं, बल्कि वैकल्पिक वैल्यू स्टोर की भूमिका भी निभा सकता है।

Crypto बाजार में व्यापक उछाल

Bitcoin की तेजी अकेली नहीं रही। Ether, Solana और XRP जैसे बड़े क्रिप्टो टोकन में भी 8 से 10 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई। यह बताता है कि निवेशकों का भरोसा सिर्फ Bitcoin तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे डिजिटल एसेट स्पेस में वापसी हो रही है।

क्या बदल रही है सेफ हेवन की परिभाषा?

हालिया ट्रेंड यह संकेत जरूर देता है कि निवेशक अब पारंपरिक एसेट्स के साथ-साथ नए विकल्पों पर भी भरोसा जता रहे हैं। हालांकि, Bitcoin को पूरी तरह से सेफ हेवन मानना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि इसका व्यवहार अभी भी जोखिम वाले एसेट जैसा ही रहता है। ईरान संकट के दौरान Bitcoin का प्रदर्शन यह दिखाता है कि ग्लोबल निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है। गोल्ड की जगह लेना अभी दूर की बात है, लेकिन इतना तय है कि अब बाजार में ‘सेफ हेवन’ की परिभाषा पहले जैसी नहीं रही।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ, कमोडिटी, करेंसी या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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