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हर कोई नहीं निकाल सकता पीएफ का पूरा पैसा, क्या हैं EPFO के नए कड़े नियम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ से पैसा निकालने के नियमों को और अधिक पारदर्शी और सख्त बना दिया है। यदि आप भी अपने पीएफ खाते से एडवांस या पूरा फंड निकालने की सोच रहे हैं, तो जानिए ये नए नियम।

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क्या हैं EPFO के नए कड़े नियम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों अंशधारकों के लिए पीएफ निकासी की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ धोखाधड़ी रोकने के लिए नियमों में लगातार बदलाव कर रहा है। अक्सर देखा गया है कि लोग जरूरत पड़ने पर या नौकरी बदलते समय अपने पीएफ खाते में जमा पूरा पैसा निकालने की कोशिश करते हैं। हालांकि, ईपीएफओ के स्थापित दिशानिर्देशों के तहत कोई भी खाताधारक बिना किसी विशेष कारण या तय पात्रता पूरी किए अपने खाते से 100 फीसदी राशि नहीं निकाल सकता है। ईपीएफओ का मुख्य उद्देश्य इस राशि को कर्मचारी के बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट फंड के रूप में सुरक्षित रखना है, इसीलिए आंशिक और पूर्ण निकासी दोनों पर सख्त शर्तें लागू की गई हैं।

क्या हैं नियम?

नियमानुसार, नौकरी के दौरान पूरे पीएफ फंड की निकासी की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाती है। कोई भी अंशधारक केवल दो विशेष स्थितियों में ही अपने खाते में जमा 100% राशि निकाल सकता है। पहली स्थिति यह है कि जब कर्मचारी रिटायरमेंट की उम्र (58 वर्ष) पूरी कर लेता है, और दूसरी स्थिति तब बनती है जब व्यक्ति 2 महीने से अधिक समय से बेरोजगार हो। यदि कोई कर्मचारी बिना दो महीने का बेरोजगारी गैप दिखाए नौकरी बदलते समय पूरा पीएफ निकालने का प्रयास करता है, तो उसका क्लेम खारिज हो जाता है। नौकरी में रहते हुए आपातकालीन जरूरतों (जैसे बीमारी, शादी, घर खरीदना या बच्चों की पढ़ाई) के लिए केवल आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) या 'एडवांस' निकालने का विकल्प ही उपलब्ध रहता है।

कब कौन निकाल सकता है पैसा?

ईपीएफओ ने आंशिक निकासी और एडवांस दावों के लिए भी सेवा अवधि (Service Tenure) की सीमा तय की है। उदाहरण के लिए, यदि किसी सदस्य को घर खरीदने या निर्माण के लिए पीएफ से एडवांस लेना है, तो उसकी कम से कम 5 साल की निरंतर सेवा पूरी होना अनिवार्य है। इसी तरह, स्वयं या बच्चों की उच्च शिक्षा और शादी के लिए एडवांस क्लेम करने हेतु न्यूनतम 7 साल की सेवा होना आवश्यक है। यदि कोई कर्मचारी इन तय वर्षों की सेवा पूरी किए बिना आवेदन करता है, तो सिस्टम स्वतः ही उसके क्लेम को अस्वीकार कर देता है। इसके अलावा, हालिया नियमों के तहत ईपीएफओ ने ऑटो-सेटलमेंट (Auto-Mode Settlement) की सुविधा भी शुरू की है, जिसमें बीमारी जैसे आपातकालीन मामलों में बिना मानवीय हस्तक्षेप के 1 लाख रुपये तक का एडवांस तुरंत स्वीकृत हो जाता है।

पीएफ निकासी से जुड़े कर नियमों (Tax Rules) को लेकर भी ईपीएफओ और आयकर विभाग ने कड़े प्रावधान बनाए हैं। यदि कोई सदस्य 5 साल की निरंतर सेवा पूरी करने से पहले अपने पीएफ खाते से 50,000 रुपये या उससे अधिक की राशि निकालता है, तो उस पर टीडीएस (TDS) काटा जाता है। यदि खाताधारक का पैन कार्ड (PAN) ईपीएफओ पोर्टल से लिंक है, तो 10 फीसदी की दर से टीडीएस कटता है, जबकि पैन लिंक न होने की स्थिति में यह कटौती बढ़कर 30 फीसदी तक हो सकती है। यही कारण है कि ईपीएफओ अपने सभी सदस्यों को सलाह देता है कि वे अपने यूएएन (UAN) में बैंक खाता, पैन और ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया समय रहते पूरी रखें, ताकि वैध निकासी के दौरान कोई अड़चन न आए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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