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तीन साल से न ग्रोथ, न प्रॉफिट फिर भी 60% FII की हिस्सेदारी, क्यों कायम है भरोसा?

आमतौर पर माना जाता है कि जिन स्टॉक्स में FII की होल्डिंग ज्यादा होती है, उन स्टॉक्स के फंडामेंटल मजबूत होते हैं, या उनका बिजनेस मॉडल बेहद दमदार होता है। ऐसे ही एक स्टॉक के बारे में जानिए।

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60 फीसदी से ज्यादा है FII की हिस्सेदारी

Redington FII Holding India: तीन साल से कमाई की रफ्तार सुस्त है, मार्जिन भी सीमित हैं, लेकिन इसके बावजूद Redington Limited में विदेशी निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी 60% के पार बनी हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर इस स्टॉक में ऐसा क्या है , जो FIIs के चहेते स्टॉक्स की लिस्ट में बना हुआ है। Redington कोई तेज रफ्तार ग्रोथ वाली कंपनी नहीं है, लेकिन इसका मजबूत ग्लोबल नेटवर्क, स्थिर बिजनेस मॉडल और आकर्षक वैल्यूएशन इसे FIIs के लिए भरोसेमंद विकल्प बनाते हैं। यही वजह है कि सीमित ग्रोथ के बावजूद विदेशी निवेशकों का विश्वास इस स्टॉक में कायम है।

ग्रोथ सुस्त, लेकिन स्केल मजबूत

Redington के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल में प्रॉफिट ग्रोथ लगभग ठहरी रही है। मार्जिन 2-3% के सीमित दायरे में ही बने हुए हैं, जो इसके लो-मार्जिन डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस को दर्शाता है। हालांकि, इसके उलट कंपनी का रेवेन्यू लगातार बढ़ता हुआ दिखता है और अब ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है। यह संकेत देता है कि कंपनी का ऑपरेशन स्केल मजबूत है और डिमांड स्थिर बनी हुई है।

मेट्रिक3 साल पहले (FY22)हालिया (TTM/FY25)ट्रेंड
रेवेन्यू (₹ करोड़)62,6441,12,389मजबूत ग्रोथ
नेट प्रॉफिट (₹ करोड़)1,3151,914सीमित बढ़त
प्रॉफिट ग्रोथ (3Y CAGR)-3%सुस्ती
ऑपरेटिंग मार्जिन (OPM)~3%~2%दबाव
EPS (₹)16.3822.56हल्की बढ़त
ROE (%)~17%~14%गिरावट
ROCE (%)~28%~19%नरमी

ग्लोबल नेटवर्क बना भरोसे की नींव

कंपनी 30 से ज्यादा देशों में मौजूद है और 40 से अधिक बाजारों को सर्व करती है। Apple, Microsoft और HP जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ इसकी पार्टनरशिप इसे सप्लाई चेन में एक अहम कड़ी बनाती है। यही व्यापक नेटवर्क और मजबूत ब्रांड कनेक्ट FIIs को दीर्घकालिक स्थिरता का भरोसा देता है, भले ही शॉर्ट टर्म में ग्रोथ सीमित हो।

पैरामीटरडिटेल
ऑपरेशन वाले देश30+ देश
मार्केट कवरेज40+ बाजार
रीजनल रेवेन्यूSISA (India + South Asia + Singapore): 50.1%
Rest of World: 49.9%
ब्रांड पार्टनर्स450+ (Apple, Microsoft, HP, Lenovo आदि)
टॉप वेंडर योगदानApple: 29%, HP: 10%, Lenovo: 8%, Dell: 6%, Samsung: 6%
डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रा200+ वेयरहाउस, 7.7 मिलियन स्क्वायर फीट स्पेस
सर्विस नेटवर्क16+ अपने सर्विस सेंटर, 25+ पार्टनर सेंटर
इंटरनेशनल सब्सिडियरी55+ विदेशी यूनिट्स
बिजनेस मॉडलIT डिस्ट्रीब्यूशन + सप्लाई चेन + क्लाउड + मोबिलिटी

कम वैल्यूएशन में सेफ्टी मार्जिन

करीब 12 के P/E पर ट्रेड हो रहा यह स्टॉक वैल्यू इनवेस्टर्स के लिए आकर्षक बना हुआ है। कम वैल्यूएशन FIIs को downside protection देता है और यही वजह है कि वे इसे एक “safe bet” के तौर पर देखते हैं। साथ ही 3% के आसपास का डिविडेंड यील्ड इसे स्थिर रिटर्न वाला विकल्प बनाता है।

नए सेगमेंट्स से भविष्य की उम्मीद

Redington ने क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ानी शुरू की है। ये सेगमेंट्स अभी छोटे हैं, लेकिन आने वाले समय में ग्रोथ के नए इंजन बन सकते हैं। FIIs इस संभावित विस्तार को एक लॉन्ग टर्म ट्रिगर के रूप में देख रहे हैं।

कमजोरियां भी चिंता का विषय

हालांकि कंपनी की कमाई में बड़ा हिस्सा अन्य आय से आता है, जो इसकी कोर ऑपरेटिंग मजबूती पर सवाल उठाता है। इसके अलावा, लो-मार्जिन बिजनेस मॉडल के कारण किसी भी आर्थिक सुस्ती या डिमांड शॉक का असर तेजी से दिख सकता है।

शेयरहोल्डिंग में साफ दिखता ट्रेंड

मार्च 2023 से लेकर 2025 के अंत तक FIIs की हिस्सेदारी लगातार 56% से बढ़कर करीब 62% तक पहुंच गई है। यह ट्रेंड बताता है कि विदेशी निवेशक कंपनी को ग्रोथ स्टोरी नहीं, बल्कि स्थिर और भरोसेमंद कैश फ्लो प्ले के रूप में देख रहे हैं।

क्वार्टरFII (%)DII (%)पब्लिक (%)सरकार (%)
Mar 202360.5016.6822.820.01
Jun 202359.2217.4023.360.03
Sep 202356.2617.3826.340.03
Dec 202356.9917.9225.050.03
Mar 202458.0918.5723.290.03
Jun 202457.8718.1423.990.00
Sep 202458.0718.0823.840.00
Dec 202458.5318.6422.820.00
Mar 202560.5717.8721.500.05
Jun 202562.5816.6520.710.06
Sep 202561.8116.9721.170.05
Dec 202561.9417.2820.730.05

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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