New Loan Rules 2026: कल यानी 1 अप्रैल से एक नई वित्त वर्ष की शुरुआत होने जा रही है। इसी के साथ इस वर्ष लोन, क्रेडिट स्कोर और नॉमिनी से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए जा रहे है। ये नियम उधार लेने वालों के लिए राहत भरे होंगे। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी निर्देशों के तहत ये बदलाव अलग-अलग समय पर लागू होंगे, लेकिन इनका प्रभाव कर्ज लेने की प्रक्रिया को अधिक आसान, पारदर्शी और ग्राहक-हितैषी बनाने के रूप में देखा जाएगा।
समय से पहले लोन चुकाना
सबसे बड़ा बदलाव प्रीपेमेंट (समय से पहले लोन चुकाने) से जुड़े नियमों में देखने को मिलेगा। अब फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं लिया जाएगा। यह नियम 1 जनवरी 2026 से स्वीकृत या रिन्यू किए गए लोन पर लागू होगा और इसमें होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन शामिल हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति अपने होम लोन या पर्सनल लोन को समय से पहले चुकाना चाहता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इससे ग्राहकों को अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी और वे ब्याज का बोझ कम कर सकेंगे।
क्रेडिट स्कोर अपडेट
इसी तरह, एक बड़ा बदलाव क्रेडिट स्कोर अपडेट से जुड़ा है। अब क्रेडिट स्कोर पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से अपडेट होंगे। इन्हें हर हफ्ते अपडेट किया जाएगा। ये नियम 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह से लागू हो जाएंगे। इससे लोन लेने वालों को फायदा होगा क्योंकि समय पर EMI चुकाने का असर जल्दी दिखेगा। यानी अगर आप अनुशासित तरीके से भुगतान करते हैं तो आपकी क्रेडिट प्रोफाइल तेजी से बेहतर होगी और भविष्य में लोन मिलना आसान हो जाएगा।
अधिकतम चार नामिनीज
इसके अलावा, बता दें कि Reserve Bank of India ने अब बैंक अकाउंट और लॉकर के लिए अधिकतम चार नामिनीज की अनुमति दी है। इसमें डिपॉजिट अकाउंट के लिए एक साथ या क्रमिक नामिनीज (successive nominees) और लॉकर/सेफ-किपिंग आइटम के लिए क्रमिक नामिनीज शामिल हैं। यह बेसिक बैंकिंग स्तर पर एस्टेट प्लानिंग को आसान बनाता है । इसी के साथ मृत्यु के मामले में संपत्ति का ट्रांसफर आसान हो जाता है और विवाद और प्रशासनिक देरी कम होती है।
ज्वेलर्स के लिए गोल्ड लोन राहत
ज्वेलरी बिजनेस के लिए गोल्ड लोन की अदायगी अवधि 1 अप्रैल 2026 से 180 दिन से बढ़ाकर 270 दिन कर दी गई है। यह बदलाव नकदी प्रवाह (cash flow) को बेहतर बनाने और रिफाइनेंसिंग के दबाव को कम करने के लिए किया गया है। हालांकि इसका सीधा असर रिटेल उधारकर्ताओं पर नहीं होगा, लेकिन गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े क्षेत्रों में क्रेडिट की उपलब्धता और लागत पर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
