देश में नए लेबर कोड को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही है। सरकार ने इन कोड्स के जरिए ऐसे बड़े बदलाव पेश किए हैं, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों की नौकरी, सैलरी, छुट्टियों और वर्क–लाइफ बैलेंस पर असर डालेंगे। कई दशकों बाद कर्मचारियों से जुड़े नियमों को एक नई दिशा दी जा रही है ताकि काम करने वालों के अधिकार मजबूत हों और कंपनियों में पारदर्शिता बढ़े। सबसे बड़ी बात यह है कि नए लेबर कोड में छुट्टियों के सिस्टम और काम के घंटों को काफी स्पष्ट बनाया गया है।
टेक-होम कम, PF और ग्रेच्युटी ज्यादा
सबसे पहले असर सैलरी स्ट्रक्चर पर देखने को मिलेगा। नए लेबर कोड में कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल वेतन के 50% से कम नहीं हो सकती। इसका मतलब यह है कि टेक-होम यानी हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है क्योंकि PF और ग्रेच्युटी में कटौती बढ़ जाएगी। लेकिन इसका फायदा लंबे समय में मिलेगा, क्योंकि PF और रिटायरमेंट फंड पहले से ज्यादा मजबूत होगा। जैसे—अगर किसी कर्मचारी की सैलरी 50,000 रुपये है और पहले उसका बेसिक 20,000 था, तो अब इसे बढ़ाकर 25,000 करना होगा। इससे PF और ग्रेच्युटी दोनों बढ़ेंगे और रिटायरमेंट के समय रकम भी अधिक मिलेगी।
48 घंटे वीक वर्क–लाइफ बैलेंस पर खास जोर
नए लेबर कोड का सबसे बड़ा बदलाव है काम के घंटे। अब सप्ताह में कुल 48 घंटे काम करने का नियम तय किया गया है। यह कंपनियों को यह विकल्प देता है कि वे 8 घंटे की बजाय 10 या 12 घंटे काम करा सकती हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कर्मचारियों को अधिक छुट्टियां देनी होंगी। यानी 5-दिन या 4-दिन वर्किंग वीक का विकल्प भी खुल सकता है।
इसके अलावा, छुट्टियों का रिकॉर्ड और ब्रेक टाइम पर भी ज्यादा पारदर्शिता लाई जा रही है। कौन–सी छुट्टी कब मिलेगी, किस स्थिति में मिलेगा ऑफ, ओवरटाइम की पेमेंट कैसी होगी अब ये बातें साफ़ तौर पर लिखी होंगी। इससे कर्मचारियों का मानसिक दबाव कम होगा और उन्हें परिवार तथा निजी जिंदगी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
छुट्टियों में सुधार छुट्टियां बढ़ेंगी, रिजेक्शन कम होगा
नए नियमों के लागू होने के बाद कर्मचारियों के लिए छुट्टियां लेना अब पहले से कहीं आसान हो जाएगा, क्योंकि कंपनियों को पर्याप्त छुट्टियां देना अनिवार्य कर दिया गया है। बदलावों के तहत सालाना छुट्टियों की संख्या बढ़ सकती है, छुट्टियां रिजेक्ट करना कंपनियों के लिए मुश्किल होगा और उन्हें कैरी–फॉरवर्ड करने की प्रक्रिया भी आसान कर दी जाएगी। इतना ही नहीं, लंबे घंटों तक काम लेने पर कंपनियों को अतिरिक्त छुट्टी देना जरूरी होगा। इन सभी सुधारों का उद्देश्य कर्मचारियों का वर्कलोड कम करना और छुट्टियों की प्रणाली को पहले से अधिक लचीला व फायदेमंद बनाना है।
कॉन्ट्रैक्ट व वर्कर्स को भी मिलेंगे रिटायरमेंट फायदे
नए लेबर कोड की एक बड़ी बात यह है कि अब फिक्स्ड टर्म या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों की तरह ग्रेच्युटी का फायदा मिलेगा। इससे लाखों युवाओं को सुरक्षा मिलेगी जो प्रोजेक्ट या स्टार्टअप्स में कम समय के लिए काम करते हैं। विवाद समाधान प्रक्रिया भी अब तेज और सरल होगी, जिससे नौकरी से जुड़े विवाद लंबा नहीं खिंचेंगे।
कंपनियों पर असर
नए लेबर कोड से कंपनियों पर शुरुआती समय में लागत बढ़ सकती है क्योंकि PF और ग्रेच्युटी की राशि ज्यादा कटेगी। लेकिन लंबे समय में यह सिस्टम कंपनियों के लिए भी लाभदायक है क्योंकि कर्मचारियों की संतुष्टि और रिटेंशन बढ़ेगा। HR और मैनेजमेंट टीमों को नियमों की मॉनिटरिंग करना आसान होगा और कंप्लायंस में भी स्पष्टता आएगी।
नया कोड उन कामगारों के लिए भी फायदेमंद है, जो ई–कॉमर्स, ऐप आधारित प्लेटफॉर्म, डिलीवरी, ड्राइवर या असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। पहली बार उन्हें भी सामाजिक सुरक्षा जैसे पेंशन, इंश्योरेंस और मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी। इससे करोड़ों श्रमिकों को औपचारिक पहचान और सुरक्षा मिलेगी।
