भारत में हर साल 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष (Financial Year) शुरू होता है, लेकिन इस बार का 1 अप्रैल टैक्सपेयर्स के लिए सामान्य से कहीं ज्यादा अलग होने वाला है। सरकार 'न्यू इनकम टैक्स एक्ट' के जरिए देश की कर व्यवस्था में कई बड़े और क्रांतिकारी बदलाव लागू करने जा रही है। इन बदलावों का सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी, टैक्स फाइलिंग के तरीके और निवेश की प्लानिंग पर पड़ेगा। अक्सर लोग लास्ट मोमेंट में टैक्स बचाने की भागदौड़ करते हैं, लेकिन नियमों में हो रहे इन बुनियादी बदलावों को अगर समय रहते नहीं समझा गया, तो आपको न केवल भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है, बल्कि कानूनी पचड़ों का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं 1 अप्रैल से क्या क्या बदल रहा है?
क्यों उठाया गया ये कदम?
नए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। इसमें असेसमेंट ईयर (निर्धारण वर्ष) की परिभाषा से लेकर रिवाइज्ड रिटर्न (संशोधित रिटर्न) दाखिल करने की समय सीमा तक, कई पुराने प्रावधानों को बदला गया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे वैश्विक आर्थिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के बीच, सरकार का ध्यान घरेलू कर संग्रह को मजबूत करने और कर चोरी को रोकने पर है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए एसटीटी (STT) की दरों में बदलाव और एचआरए (HRA) के नियमों का विस्तार इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। टैक्सपेयर्स के लिए यह समझना अनिवार्य है कि अब 'डिफ़ॉल्ट' टैक्स व्यवस्था क्या होगी और उन्हें पुरानी व्यवस्था चुनने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।
HRA का दायरा बढ़ाया गया
इन बदलावों में सबसे राहत भरी बात उन लोगों के लिए है जो नए मेट्रो शहरों में रहते हैं, क्योंकि एचआरए छूट का दायरा अब बढ़ाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, जो लोग अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने में देरी करते हैं या गलती सुधारने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न का सहारा लेते हैं, उनके लिए समय सीमा को और सख्त कर दिया गया है। डिजिटल असेट्स और ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली कमाई पर भी टैक्स के शिकंजे को और कसा गया है। कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से लागू होने वाला यह नया कानून एक नए युग की शुरुआत है जहाँ कागजी कार्रवाई कम और डेटा-आधारित असेसमेंट ज्यादा होगा।
टैक्सपेयर्स के लिए 9 सबसे बड़े बदलाव
- डिफ़ॉल्ट टैक्स व्यवस्था (Default Tax Regime): अब 'न्यू टैक्स रिजीम' ही आपकी डिफ़ॉल्ट व्यवस्था होगी। अगर आप पुरानी व्यवस्था (Old Regime) के तहत टैक्स छूट (जैसे 80C, 80D) का लाभ लेना चाहते हैं, तो आपको आईटीआर भरते समय इसे विशेष रूप से चुनना होगा।
- रिवाइज्ड रिटर्न की नई डेडलाइन: अगर आपसे ओरिजिनल रिटर्न में कोई गलती हो जाती है, तो उसे सुधारने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न की समय सीमा अब कम कर दी गई है। इसे अब असेसमेंट ईयर खत्म होने से काफी पहले ही निपटाना होगा।
- HRA छूट का विस्तार: अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के अलावा 4 अन्य बड़े शहरों को भी 'मेट्रो' की श्रेणी में रखा गया है, जिससे वहां रहने वाले किराएदारों को 50% एचआरए छूट का लाभ मिल सकेगा।
- STT (Securities Transaction Tax) में बढ़ोतरी: शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों के लिए एसटीटी की दरों को बढ़ाया गया है, जिससे ट्रेडिंग की लागत थोड़ी बढ़ जाएगी।
- असेसमेंट प्रक्रिया में बदलाव: सरकार अब 'फेसलेस असेसमेंट' को और अधिक प्रभावी बना रही है। अब करदाताओं को स्क्रूटनी के लिए ऑफिस के चक्कर नहीं काटने होंगे, सारा काम ऑनलाइन और रैंडम सिलेक्शन के आधार पर होगा।
- स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ: नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को ₹50,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ अब और अधिक सुव्यवस्थित तरीके से मिलेगा।
- ऑनलाइन गेमिंग पर टीडीएस: ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली जीत पर अब जीत की राशि के भुगतान के समय ही 30% टीडीएस (
TDS ) काटने का कड़ा प्रावधान लागू होगा। - लीव एनकैशमेंट लिमिट: गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के समय लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट की सीमा में जो बढ़ोतरी की गई थी, उसे नए एक्ट के तहत सुचारू रूप से लागू किया जाएगा।
- डिजिटल एसेट्स पर टैक्स: क्रिप्टोकरेंसी या अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के ट्रांसफर से होने वाली आय पर 30% टैक्स के साथ-साथ अब रिपोर्टिंग के नियमों को और सख्त कर दिया गया है।
