टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को मंगलवार को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का न्यासी (ट्रस्टी) नियुक्त किया गया है। यह ट्रस्ट टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस में 27.98% हिस्सेदारी रखता है और समूह का सबसे बड़ा शेयरधारक है।
दो गुटों के विवाद के बाद लिया गया फैसला
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ट्रस्ट से जुड़े दो गुटों के बीच चल रही खींचतान हाल ही में खत्म हुई है। एक गुट का नेतृत्व नोएल टाटा कर रहे थे, जबकि दूसरा गुट रतन टाटा के करीबी मेहली मिस्त्री के नेतृत्व में था। दोनों के बीच टाटा संस में 66% हिस्सेदारी रखने वाले ट्रस्टों के प्रबंधन को लेकर विवाद चल रहा था। बाद में मिस्त्री को प्रमुख ट्रस्टों से बाहर कर दिया गया और उन्होंने इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती नहीं दी।
नेविल टाटा की पृष्ठभूमि
32 वर्षीय नेविल टाटा ने 2016 में अपने पिता के कारोबार ट्रेंट में काम शुरू किया था। वे सफल कपड़ों की खुदरा सीरीज “जूडियो” (Zudio) का नेतृत्व कर रहे हैं। नेविल की यह नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से नोएल टाटा ने अपने परिवार की टाटा ट्रस्ट पर पकड़ और मजबूत कर ली है।
भास्कर भट्ट और वेणु श्रीनिवासन भी बने न्यासी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नेविल के साथ ही टाटा समूह के अनुभवी अधिकारी भास्कर भट्ट को भी ट्रस्ट का न्यासी बनाया गया है। भट्ट पहले टाइटन कंपनी के प्रमुख रहे हैं और टाटा ब्रांड से लंबे समय से जुड़े हैं। इसके अलावा, वेणु श्रीनिवासन को भी तीन साल की अवधि के लिए न्यासी नियुक्त किया गया है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने नियमों में बदलाव किया है, जिसके बाद किसी भी न्यासी को आजीवन नियुक्त नहीं किया जा सकता। इसी कारण श्रीनिवासन का कार्यकाल घटाकर तीन साल का कर दिया गया है। उन्हें ट्रस्ट का वाइस चेयरमैन भी बनाया गया है।
न्यासी बोर्ड का सर्वसम्मति से निर्णय
जारी बयान के अनुसार, नेविल टाटा की नियुक्ति सर्वसम्मति से की गई है। यह कदम टाटा ट्रस्ट की नई दिशा और पारदर्शी नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
