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10 साल में चाहिए 1 करोड़ रुपये, जानें कितने रुपये की करें मंथली SIP

एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान वह तरीका है, जिसमें निवेशक तय तारीख पर हर महीने एक निश्चित रकम म्यूचुअल फंड में लगाते हैं। धीरे-धीरे यह रकम बढ़कर बड़ा फंड बन जाती है। आसान शब्दों में कहें तो अगर आप नियमित निवेश करें और सही SIP चुनें, तो सिर्फ 10 साल में 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं।​​

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SIP Investment Crorepati

आजकल लोग लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP) को सबसे बेहतर निवेश विकल्प मानते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आप छोटे-छोटे अमाउंट से शुरुआत कर सकते हैं और लंबे समय में अच्छा रिटर्न पा सकते हैं। इसमें निवेशक हर महीने किस्तों में निवेश कर सकते हैं और चाहें तो कुछ समय के लिए SIP को रोक भी सकते हैं। यही वजह है कि यह एक लचीला और आसान तरीका माना जाता है बड़ी रकम बनाने का। लेकिन अगर आपको 10 साल या 15 साल में करोड़पति बनना है तो आइए आपको बताते हैं आपको हर महीने कितने की SIP करनी होगी?

क्या है SIP?

एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान वह तरीका है, जिसमें निवेशक तय तारीख पर हर महीने एक निश्चित रकम म्यूचुअल फंड में लगाते हैं। धीरे-धीरे यह रकम बढ़कर बड़ा फंड बन जाती है। आसान शब्दों में कहें तो अगर आप नियमित निवेश करें और सही SIP चुनें, तो सिर्फ 10 साल में 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं।

हर महीने कितना करना होगा निवेश?

म्यूचुअल फंड SIP से मिलने वाला रिटर्न मार्केट पर निर्भर करता है। औसतन इसमें 12 से 16 फीसदी तक सालाना रिटर्न मिल सकता है। अगर 12 फीसदी अनुमानित रिटर्न के हिसाब से कैलकुलेशन करें तो हर महीने 45 हजार रुपये निवेश करने होंगे। इस हिसाब से 10 साल बाद लगभग 1 करोड़ रुपये का फंड बन जाएगा। यानी 10 साल में आपने कुल 54 लाख निवेश किए और आपको 1 करोड़ का रिटर्न ब्याज के साथ मिला है। वहीं अगर 15 फीसदी रिटर्न मिले तो हर महीने 39 हजार रुपये निवेश करने पर 10 साल में करीब 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो सकता है। हालांकि, इसमें टैक्स और कुछ चार्जेस भी कटते हैं।

SIP करने वालों के लिए टिप

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश करते समय पोर्टफोलियो हमेशा डायवर्सिफाई होना चाहिए। इसका मतलब है कि पैसा सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि सुरक्षित और रिस्क वाले दोनों विकल्पों में लगाना चाहिए। सुरक्षित निवेश के लिए पोस्ट ऑफिस स्कीम, सरकारी बॉन्ड और एफडी जैसे विकल्प चुन सकते हैं, जबकि ज्यादा रिटर्न के लिए इक्विटी और हाइब्रिड म्यूचुअल फंड बेहतर रहते हैं। अगर निवेशक रिस्क कम करना चाहते हैं तो डेब्ट म्यूचुअल फंड या हाइब्रिड फंड भी सही विकल्प साबित हो सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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