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म्यूचुअल फंड SIP इन्वेस्टर्स हो जाएं सावधान! 2026 में भारी पड़ सकती हैं ये 5 गलतियों

2026 में SIP निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन, निवेशक कई बार ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिनकी वजह से न केवल वे अपने लॉन्ग टर्म गोल हासिल करने से चूक जाते हैं। बल्कि, नुकसान भी उठाते हैं।

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निवेशक अक्सर करते हैं गलतियां

Mutual Fund SIP Investment Tips: साल 2026 में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री रिकॉर्ड ग्रोथ देख रही है, लेकिन इसी तेजी के बीच रिटेल निवेशकों की कुछ बड़ी गलतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2016 में जहां मासिक SIP इनफ्लो सिर्फ ₹3,122 करोड़ था, वहीं मार्च 2026 में यह बढ़कर ₹32,087 करोड़ तक पहुंच गया। अप्रैल 2026 में भी SIP इनफ्लो ₹31,115 करोड़ के मजबूत स्तर पर बना रहा। यह दिखाता है कि देश में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

क्यों सिर्फ निवेश पर्याप्त नहीं?

एक्सपर्ट्स और आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ SIP शुरू कर देना ही बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अगर निवेश की रणनीति के नाम पर आप सिर्फ आंखें बंद कर पैसे जमा कर रहे हैं, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि सही समय पर सही कदम नहीं उठाने से लंबे समय में मुनाफा तो दूर नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। बहरहाल, यहां वे 5 गलतियां बताई गई हैं, जिन्हें 2026 में किसी भी SIP इन्वेस्टर को नहीं करना चाहिए।

बिना लक्ष्य के SIP शुरू करना

कई बार लोग सिर्फ ट्रेंड देखकर SIP शुरू कर देते हैं। किसी दोस्त ने कहा, ऑफिस में चर्चा हुई या सोशल मीडिया पर किसी ने रिटर्न दिखाया, तो लोग बिना सोचे-समझे निवेश शुरू कर देते हैं। लेकिन, बिना किसी लक्ष्य के निवेश समझदारी नहीं। क्योंकि, अगर यह नहीं जानते कि पैसा किस मकसद के लिए जमा कर रहे हैं, तो सही फंड चुनना मुश्किल होता है। कई लोग शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए हाई रिस्क स्मॉल-कैप फंड चुन लेते हैं। लेकिन, बाजार गिरने पर भारी नुकसान होने पर परेशान हो उठते हैं। फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि हर SIP का एक मकसद और समय-सीमा तय होनी चाहिए।

बाजार गिरते ही SIP रोकना

जब बाजार में गिरावट आती है, तो अधिकतर रिटेल निवेशक डर जाते हैं। यही वजह है कि मार्केट करेक्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी SIP बंद कर देते हैं। जबकि, तमाम एक्सपर्ट्स इसे सबसे नुकसानदायक फैसला मानते हैं। दरअसल SIP की सबसे बड़ी ताकत ही बाजार की गिरावट होती है। जब NAV नीचे आता है, तब निवेशक को कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। यही रणनीति लंबे समय में औसत लागत कम करती है और बेहतर रिटर्न दिलाती है। अगर निवेशक गिरावट के समय SIP बंद कर देता है, तो वह कंपाउंडिंग के सबसे बड़े मौके को गंवा देता है। पिछले कई बाजार चक्रों में यह देखा गया है कि जो निवेशक गिरावट के दौरान टिके रहे, उन्हें लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिला।

सिर्फ स्मॉल-कैप या थीमैटिक फंड्स में निवेश

2026 में कई निवेशक हिस्टोरिक हाई रिटर्न देखकर सिर्फ स्मॉल-कैप, डिफेंस, PSU या किसी खास सेक्टर के थीमैटिक फंड्स में पैसा लगा रहे हैं। तेजी के दौर में ये फंड शानदार रिटर्न देते दिखाई देते हैं, लेकिन गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान भी इन्हीं में होता है। डाइवर्सिफिकेशन की कमी आपके पूरे पोर्टफोलियो को जोखिम में डाल सकती है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोर्टफोलियो में अलग-अलग एसेट क्लास का संतुलन होना जरूरी है। सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स और जरूरत के हिसाब से गोल्ड जैसे विकल्प भी शामिल होने चाहिए। अगर पूरा पैसा एक ही सेक्टर या कैटेगरी में होगा और वहां गिरावट आ गई, तो पोर्टफोलियो को बड़ा झटका लग सकता है।

एक्सपेंस रेशियो और फंड परफॉर्मेंस को नहीं समझना

कई निवेशक सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर फंड चुनते हैं। लेकिन वे यह नहीं देखते कि उस फंड का एक्सपेंस रेशियो कितना है। इसके अलावा फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है। क्या फंड अपने बेंचमार्क इंडेक्स को बीट कर पा रहा है या नहीं। असल में एक्सपेंस रेशियो वह फीस होती है, जो AMC निवेशकों से फंड मैनेजमेंट के बदले वसूलती है। यह फीस फंड के आकार के सामने बहुत छोटी दिखती है, लेकिन लंबे समय में आपके रिटर्न पर बड़ा असर डालती है। मान लीजिए दो फंड्स का रिटर्न लगभग बराबर है, लेकिन एक का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा है, तो अंत में आपके हाथ में कम पैसा आएगा। इसलिए निवेशकों को समय-समय पर अपने फंड्स का रिव्यू करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बेहतर विकल्प चुनने चाहिए।

बढ़ती आय के साथ SIP नहीं बढ़ाना

बड़ी संख्या में लोग कई सालों तक एक ही रकम की SIP चलाते रहते हैं। इस बीच उनकी सैलरी बढ़ती है, खर्च बढ़ते हैं, लाइफस्टाइल बदलती है, लेकिन निवेश की रकम उतनी ही बनी रहती है। महंगाई के दौर में यह रणनीति भविष्य के लिए खतरा बन सकती है। अगर आपकी आय हर साल बढ़ रही है, तो SIP में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। इसे Step-Up SIP रणनीति कहा जाता है। मसलन, अगर हर साल अपनी SIP में 10% की बढ़ोतरी करते हैं, तो लंबे समय में उसका फंड कई गुना बड़ा हो सकता है। फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि सिर्फ निवेश शुरू करना काफी नहीं है, बल्कि समय के साथ निवेश की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है।

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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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