शेयर बाजार में लंबे समय से सुस्ती है। इसका असर अब म्यूचुअल फंड निवेश पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशक म्यूचुअल फंड से मुंह मोड़ रहे हैं। बता दें कि जुलाई महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 15 प्रतिशत घटकर 24,697 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, SIP के जरिये निवेश जारी रहा। म्यूचुअल फंड उद्योग के संगठन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी योजनाओं में निवेश जून के 28,973 करोड़ रुपये और पिछले साल जुलाई के 42,702 करोड़ रुपये की तुलना में काफी कम रहा।
एसआईपी के जरिये निवेश में भी सुस्ती
हालांकि, खुदरा निवेशकों की भागीदारी बनी रहने से जुलाई में एसआईपी के जरिये निवेश मामूली रूप से बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये हो गया, जो जून में 31,781 करोड़ रुपये था। एसआईपी के जरिये निवेश लगातार पांचवें महीने 31,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा।
आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी योजनाओं की विभिन्न श्रेणियों में स्मॉलकैप फंड में सबसे अधिक 7,768 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके बाद मिडकैप फंड में 6,192 करोड़ रुपये और फ्लेक्सी-कैप फंड में 4,710 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लार्जकैप फंड में 1,322 करोड़ रुपये आए।
संपत्ति प्रबंधन फर्म इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक अंकुर पुंज ने कहा कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश में कमी निवेशकों का इक्विटी से भरोसा उठने के बजाय कुछ हद तक अधिक चयनात्मक रुख को दर्शाती है। मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कारोबार अधिकारी अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि इक्विटी-केंद्रित म्यूचुअल फंड के प्रति निवेशकों का सतर्क रुख पिछले दो वर्षों में अपेक्षाकृत कम रिटर्न की वजह से भी रहा।
म्यूचुअल फंड से निकासी भी बढ़ी
समूचे म्यूचुअल फंड उद्योग में जुलाई के दौरान स्थिति बदली और करीब 2.36 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जबकि जून में 52,949 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी। इस बदलाव की अगुवाई ऋण आधारित फंड योजनाओं ने की, जिनमें जुलाई में करीब 1.88 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया जबकि जून में 1.09 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। लिक्विड फंड में सबसे अधिक 1,19,066 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके बाद ओवरनाइट फंड में 40,413 करोड़ रुपये और मनी मार्केट फंड में 21,180 करोड़ रुपये आए।
ग्रो म्यूचुअल फंड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वरुण गुप्ता ने कहा कि ऋण योजनाओं में निवेश में तेज बदलाव लिक्विड, ओवरनाइट और मनी मार्केट फंड में मजबूत निवेश से आया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अपने ऋण पोर्टफोलियो में तरलता और लचीलेपन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
