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पर्सनल लोन के लिए एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले जरूर चेक करें ये 5 चीजें, वरना बाद में होगा पछतावा

पर्सनल लोन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें जानना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग जल्दीबाजी में या बिना पूरी तरह समझे लोन डॉक्यूमेंट पर साइन कर देते हैं, जिससे बाद में उन्हें भारी ब्याज, छिपे चार्ज या अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए आपको बताते हैं क्या हैं वो?

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Personal Loan

क्या आपने पर्सनल लोन के लिए अप्लाई किया है या जल्द ही करने वाले हैं? अगर हां तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। पर्सनल लोन एक आसान फाइनेंशियल सॉल्यूशन हो सकता है, लेकिन इसके एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझना और चेक करना बहुत जरुरी है। कई बार लोग जल्दबाजी में या बिना समझे-समझे लोन एग्रीमेंट पर साइन कर देते हैं, जिससे बाद में उन्हें बड़ा पछतावा होता है। अतिरिक्त खर्च, पेनाल्टी या अन्य समस्याओं का सामना करना पड़े ऐसे में आपको लोन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले कुछ चीजें जरूर चेक करनी चाहिए आइए आपको बताते हैं क्या हैं वो?

प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्जेज

यदि आप लोन को समय से पहले चुका देना चाहते हैं, तो कुछ बैंकों में प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज लग सकते हैं, जो आमतौर पर बाकी बचे लोन अमाउंट का 2% से 5% तक होते हैं। इसलिए, एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक या एनबीएफसी पर्सनल लोन जल्दी चुकाने पर कितने चार्जेज वसूलेगा।

लेट पेमेंट और डिफॉल्ट पेनाल्टी

एक भी ईएमआई छूटना आपके क्रेडिट स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ ही, बैंक लेट पेमेंट पर पेनाल्टी चार्ज भी वसूलते हैं। कुछ बैंक एक तय रकम लेते हैं, तो कुछ बाकी बचे ईएमआई अमाउंट का एक प्रतिशत। यही वजह है कि देर से भुगतान करने पर ब्याज से ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है। इससे बचने का सबसे आसान तरीका है ऑटो डेबिट ऑर्डर लगाना, ताकि ईएमआई समय पर कट जाए।

छिपे हुए प्रोसेसिंग और सर्विस चार्जेस

बैंक जब लोन का ब्याज दर बताते हैं, तो वह तो साफ होता है, लेकिन बाकी के चार्जेस अक्सर ध्यान नहीं जाते। जैसे प्रोसेसिंग फीस, डॉक्युमेंटेशन फीस और जीएसटी आदि। यहां तक कि कुछ बैंक फोरक्लोजर लेटर या लोन स्टेटमेंट के लिए भी शुल्क वसूलते हैं। इसलिए हमेशा साइन करने से पहले बैंक से यह पूछें कि कुल मिलाकर आपकी जेब से कितनी रकम कटेगी। आखिरकार, जो लोन अमाउंट आपको मिलेगा, वह इन चार्जेस के बाद थोड़ी कम ही होगी।

ब्याज दर में बदलाव से जुड़ी शर्तें

अगर आपने फ्लोटिंग रेट वाला पर्सनल लोन लिया है, तो यह समझना जरूरी है कि ब्याज दर में बदलाव कब और कैसे होगा। कुछ बैंक हर तिमाही में रेट बदलते हैं, तो कुछ साल में एक बार। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो आपकी ईएमआई भी बढ़ सकती है। इसलिए एग्रीमेंट में दिए गए इस क्लॉज को जरूर पढ़ें ताकि बाद में बढ़ी हुई किस्त देखकर झटका न लगे।

बीमा और क्रॉस-सेलिंग की चाल

कई बैंक पर्सनल लोन के साथ एक बीमा पॉलिसी भी जोड़ देते हैं, जो बेरोजगारी, बीमारी या मृत्यु की स्थिति में लोन को कवर करती है। सुनने में यह सुरक्षा जैसा लगता है, लेकिन अक्सर यह बीमा वैकल्पिक होता है। कुछ बैंक इसे अनिवार्य बताकर जोड़ देते हैं। इसलिए साइन करने से पहले यह साफ कर लें कि क्या यह बीमा जरूरी है, और क्या उसकी प्रीमियम लागत वाजिब है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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