Multibagger Stock : भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन महीने में ज्यादातर शेयरों ने नेगेटिव रिटर्न दिया है। लेकिन, इस बीच डिफेंस सेक्टर के शेयर पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Paras Defence and Space Technologies Ltd) ने निवेशकों को मालामाल किया है। 3 महीने भीतर इस शेयर ने 122% का शानदार रिटर्न दिया है। पिछले 1 महीने में भी यह शेयर करीब 61 फीसदी चढ़ा है। जबकि, 5 साल में इसने करीब 5 गुना यानी 460% का रिटर्न दिया है।
| पैरामीटर | मौजूदा आंकड़े |
| मौजूदा बाजार भाव (CMP) | ₹ 1,381 |
| मार्केट कैप (Market Cap) | ₹ 11,129 करोड़ |
| 52-हफ्ते का हाई / लो | ₹ 1,445 / ₹ 580 |
| स्टॉक P/E (Valuation) | 129 |
| बुक वैल्यू (Book Value) | ₹ 90.0 (P/B: 15.3x) |
| ROCE / ROE | 16.9% / 12.6% |
| कुल ऑर्डर बुक (FY26) | ₹ 928 करोड़ (FY25 में ₹576 करोड़ था) |
कंपनी का मार्केट कैप ₹11,100 करोड़ के पार निकल चुका है। आखिर इस स्मॉल/मिड-कैप डिफेंस शेयर में इतनी जोरदार तेजी क्यों आ रही है, इसके फंडामेंटल्स क्या हैं और क्या इस ऊंचे वैल्यूएशन पर निवेश करना सही है? आइए कंपनी के पूरे बिजनेस मॉडल, ऑर्डर बुक और ट्रिगर्स का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
तेजी के 5 सबसे बड़े कारण
मोनोपॉली बिजनेस : पारस डिफेंस डिफेंस और स्पेस इंजीनियरिंग के कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स बनाती है, जो भारत में कोई और नहीं बनाता है। मसलन, यह पूरे एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) क्षेत्र में सबमरीन पेरिस्कोप बनाने वाली अकली कंपनी है। इसके अलावा इसरो (ISRO) के अंतरिक्ष मिशनों के लिए स्वदेशी हाइपर-स्पेक्ट्रल कैमरे बनाने वाली यह एकमात्र भारतीय निजी कंपनी है। इसके साथ ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोटेक्शन सॉल्यूशंस देने वाली यह एकमात्र घरेलू कंपनी है।
ऑर्डर बुक में बंपर उछाल
कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर ₹928 करोड़ पर पहुंच गई है। यह पिछले साल में ₹576 करोड़ थी। इस ऑर्डर बुक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ऑप्टिक्स और ऑप्ट्रोनिक्स सिस्टम (60%) की है, जबकि डिफेंस इंजीनियरिंग का हिस्सा 40% है।
₹12,000 करोड़ का ऑप्टिक्स पार्क
कंपनी ने महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर देश का पहला ऑप्टिक्स पार्क बनाने के लिए ₹12,000 करोड़ के एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट 2028 से 2035 के बीच चरणों में विकसित किया जाएगा, जो एडवांस्ड ऑप्टिकल टेक में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा और 2000 से अधिक नौकरियां पैदा करेगा।
ड्रोन और एयरो-रिफ्यूलिंग में बड़े समझौते
कंपनी ने भारत में लॉजिस्टिक्स और कार्गो ड्रोन बनाने के लिए इजरायल की Heven Drones और एडवांस्ड EO/IR सिस्टम के लिए CONTROP के साथ जॉइंट वेंचर (JV) शुरू किया है।
हवा में ईंधन भरने की तकनीक
अप्रैल 2026 में कंपनी ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग सिस्टम की डिलीवरी के लिए Bandak Aviation Inc. के साथ 10 साल का विशेष समझौता किया है।
DRDO से टेक ट्रांसफर और मजबूत क्लाइंट लिस्ट
कंपनी सीधे तौर पर ISRO, DRDO, HAL, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टाटा पावर और कोचीन शिपयार्ड जैसी दिग्गज सरकारी व निजी कंपनियों के लिए काम करती है। हाल में ही कंपनी को DRDO से T-90 टैंकों के लिए ड्राइवर नाइट साइट (DNS) तकनीक का लाइसेंस मिला है। इसके साथ ही इसके एंटी-ड्रोन विंग को रक्षा मंत्रालय से ₹39 करोड़ का ऑर्डर मिला है।
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