Fertilizer Subsidy : केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसानों के बैंक खातों में उर्वरक (खाद) सब्सिडी सीधे ट्रांसफर करने की कोई योजना नहीं है। सरकार का कहना है कि देशभर में किसानों का पूरा और सत्यापित डेटाबेस अभी तैयार नहीं हुआ है। इसलिए अभी मौजूदा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था ही जारी रहेगी, जिसमें सब्सिडी किसानों को नहीं बल्कि उर्वरक कंपनियों को दी जाती है। यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी।
मौजूदा DBT व्यवस्था कैसे काम करती है?
सरकार ने बताया कि फिलहाल उर्वरक सब्सिडी का भुगतान DBT इन फर्टिलाइजर्स सिस्टम के तहत किया जाता है। इस व्यवस्था में किसान जब खाद खरीदता है, तो उसकी पहचान आधार प्रमाणीकरण के जरिए की जाती है। देशभर के उर्वरक बिक्री केंद्रों पर पॉइंट ऑफ सेल (PoS) मशीनें लगी हुई हैं, जिनके माध्यम से आधार सत्यापन के बाद बिक्री दर्ज की जाती है। इसके बाद सरकार संबंधित उर्वरक कंपनियों को बेची गई खाद के आधार पर 100 प्रतिशत सब्सिडी का भुगतान करती है। यानी मौजूदा व्यवस्था में किसानों को खाद रियायती दर पर मिलती है, जबकि सब्सिडी सीधे कंपनियों को जाती है।
सीधे किसानों के खाते में सब्सिडी क्यों नहीं?
लोकसभा में पूछा गया था कि क्या सरकार उर्वरक सब्सिडी को और पारदर्शी बनाने के लिए इसे सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने पर विचार कर रही है। इस पर सरकार ने स्पष्ट जवाब दिया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने कहा कि जब तक देश के सभी किसानों का सही और पूरा डेटाबेस तैयार नहीं हो जाता, तब तक डायरेक्ट कैश ट्रांसफर की व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि अधूरा डेटाबेस होने की स्थिति में सीधे नकद सब्सिडी देने से कई किसानों तक लाभ नहीं पहुंच पाएगा और व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका बनी रहेगी।
यूपी में खाद की कोई कमी नहीं
सरकार ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में खरीफ 2026 सीजन के दौरान उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। मंत्री के अनुसार, राज्य में यूरिया, डीएपी (DAP), एमओपी (MOP) और एनपीकेएस (NPKS) जैसे प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने कहा कि किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और घटिया गुणवत्ता वाले खाद की बिक्री रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर हर सप्ताह कार्रवाई की समीक्षा कर रहा है। सरकार का कहना है कि खाद की आपूर्ति और वितरण पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसानों को समय पर सही गुणवत्ता वाला उर्वरक मिल सके।
यूपी में हजारों छापे, कई लाइसेंस रद्द
सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 से 17 जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। इस अवधि में अधिकारियों ने 9,687 छापेमारी की। इसके अलावा 1,083 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले 548 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए। वहीं, गंभीर मामलों में 38 एफआईआर भी दर्ज की गईं।
सरकार का फोकस पारदर्शी वितरण पर
सरकार का कहना है कि मौजूदा DBT व्यवस्था के जरिए उर्वरक सब्सिडी का वितरण पहले से अधिक पारदर्शी हुआ है। आधार आधारित सत्यापन और डिजिटल बिक्री रिकॉर्ड से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सब्सिडी केवल वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। फिलहाल सरकार सीधे किसानों के खातों में सब्सिडी भेजने की योजना नहीं बना रही है, लेकिन भविष्य में किसानों का पूरा डेटाबेस तैयार होने के बाद इस दिशा में निर्णय लिया जा सकता है। अभी सरकार का मुख्य फोकस किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई जारी रखना है।
