बिजनेस

पिता का मंत्र भूल इस अरबपति ने खरीदा बंगला,जानें क्यों किराए पर रहता था परिवार

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Apr 27, 2023, 10:15 AM IST

Who is Dilip Surana:माइक्रोलैब की शुरूआत दिलीप सुराणा के पिता दिलीप सुराणा के पिता जीसी सुराणा ने की थी। वह साल 1973 में राजस्‍थान से बेंगलुरु नौकरी की तलाश में आए थे। यहां वह कुछ दिन अकाउंटेंट की नौकरी करने के बाद एक दवा कंपनी के डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बन गए।

Image

दिलीप सुराना की कंपनी डोलो दवा बनाती है।

Who is Dilip Surana:घर खरीदने से अच्छा है कि उस पैसे को कारोबार में लगाओ, पिता के इस मंत्र को अब तक मान रहे अरपबति दिलीप सुराणा ने 66 करोड़ का घर खरीद लिया है। उन्होंने बेंगलुरू में यह घर खरीदा है। इस सौदे में 12,043.22 स्क्वेयर फुट का जमीन और 8,373.99 स्क्वेयर फुट का बंगला शामिल है। खास बात यह है कि अरबपति होते हुए भी सुराणा परिवार पिछले 20 साल से किराए के मकान में रह रहा था। दिलीप सुराणा उस समय चर्चा में आए थे, जब कोरोना के दौर में उनकी कंपनी की दावा Dolo 650 खूब बिकी थी। साल 2020 में कंपनी ने इस दौर में अकेले डोलो-650 से 400 करोड़ रुपये की कमाई कर ली थी। टैक्स अथॉरिटी. उन पर डोलो बेचने के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ के गिफ्ट देने का आरोप लगा चुकी है।

बेंगलुरू के इस एरिया में है मकान

ईटी की खबर के अनुसार सुराना परिवार ने इस डील के लिए 3.36 करोड़ रुपये की स्टॉम्प ड्यूटी चुकाई है। दिलीप सुराणा डोलो बनाने वाली दवा कंपनी माइक्रो लैब्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दिलीप सुराणा (Micro Labs MD Dilip Surana) हैं। उन्होंने 66 करोड़ का जो घर खरीदा है वह यह बेंगलुरू के फेयर फील्ड लेआउट एरिया में स्थित है। दिलीप की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि सुराणा परिवार 20 साल से बेंगलुरु में किराए के मकान में रह रहा था। असल में दिलीप के पिता का मानना था कि मकान या प्रॉपर्टी में पैसा लगाने की बजाय इसे कंपनी में लगाएं। और उसी मंत्र को सुराना परिवार अभी तक मान रहा था।

11,480 करोड़ की नेटवर्थ

फोर्ब्स की लिस्ट के अनुसार दिलीप सुराणा की इस वक्त 11,480 करोड़ रुपये की नेटवर्थ है। उनकी कंपनी माइक्रोलैब का सालाना टर्नओवर करीब 5658 करोड़ रुपये टर्नओवर है। माइक्रोलैब की शुरूआत दिलीप सुराणा के पिता दिलीप सुराणा के पिता जीसी सुराणा ने की थी। वह साल 1973 में राजस्‍थान से बेंगलुरु नौकरी की तलाश में आए थे। यहां वह कुछ दिन अकाउंटेंट की नौकरी करने के बाद एक दवा कंपनी के डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बन गए। लेकिन यह काम भी उन्‍होंने कुछ दिनों में छोड़ दिया और माइक्रो लैब्‍स नाम से अपनी कंपनी शुरू की।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article