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रक्षा आत्मनिर्भता को बड़ा बूस्ट, अपने स्तर पर 1.25 लाख करोड़ तक खरीद कर पाएंगे सैन्य बल

रक्षा मंत्रालय ने देश सैन्य बलों की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये तक की खरीद कमांडर स्तर पर करने की मंजूरी दी है। इस फैसले से देश की डिफेंस इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

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सैन्य कमांडरों की बैठक में राजनाथ सिंह

Defense Minister Rajnath Singh : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार 4 जून, 2026 को रक्षा बलों और डिफेंस इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक सैन्य बलों की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्री ने फील्ड कमांडरों की तरफ से होने वाले वित्तीय खर्च की सीमा में दो गुना बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।

मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फील्ड कमांडरों की तरफ से चिकित्सा, निर्माण परियोजनाओं और रक्षा खरीद के मामलों में खर्च की सीमा को दो गुना तक बढ़ा दिया है। फील्ड कमांडरों के स्तर पर खरीद की क्षमता बढ़ने से ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी। इसके साथ ही घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

स्वदेशी हथियारों की खरीद बढ़ेगी

रक्षा मंत्रालय की तरफ से रक्षा खरीद और हथिरायों व रक्षा तकनीक पर अनुसंधान एवं विकास के लिए सैन्य कमांडरों के खर्च की मिलिड को डबल कर दिया है। अब सैन्य बल कमांडर स्तर पर स्वदेशी हथियारों की खरीद, तकनीक विकास और अनुसंधान जैसी चीजों पर 1.25 लाख करोड़ रुपये तक खर्च कर पाएंगे। पहले यह लिमिट करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक थी। इससे सेना की विदेशी कंपनियों पर निर्भतरता घटेगी और डोमेस्टिक डिफेंस इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा।

ऑपरेशनल खर्च की लिमिट भी बड़ी

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सेना, वायु सेना और नौसेना कमांडरों की विशेष वित्तीय शक्तियों में उल्लेखनीय के साथ ही उनकी तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए दी गई कुल वित्तीय सीमा में भी 100 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। वित्तीय शक्तियों की बढ़ोतरी के साथ ही सामान्य खरीद के साथ ही जॉइंट सर्विस प्रक्योरमेंट को भी बढ़ावा दिया गया है। इससे साथ ही वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को विकेंद्रीकृत करने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरणों की स्थापना की गई है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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