भारत में पहली बार – मद्रास हाई कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी को “संपत्ति” माना (तस्वीर-istock)
Cryptocurrency: मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी भारतीय कानून के तहत “संपत्ति (Property)” मानी जा सकती है। यह मामला एक निवेशक की याचिका से जुड़ा था, जिसके XRP टोकन (एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी) साइबर हमले के बाद WazirX (एक क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म) पर फ्रीज कर दिए गए थे। कोर्ट ने कहा कि क्रिप्टो को अन्य संपत्तियों की तरह रखा, उपयोग किया और ट्रस्ट में रखा जा सकता है, जिससे डिजिटल निवेशकों को अब कानूनी सुरक्षा और अधिकार मिलते हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के वकील बी श्रवन्थ शंकर ने कहा कि यह फैसला क्रिप्टो संपत्तियों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने क्रिप्टो संपत्तियों को ऐसी संपत्ति की कटैगरी में रखा है जिसे आनंदपूर्वक रखा और ट्रस्ट में सुरक्षित किया जा सकता है। यह फैसला यूके और सिंगापुर जैसे देशों की तरह भारत को भी उसी दिशा में लाता है, जहां बिटकॉइन को पहले से संपत्ति के रूप में माना गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायालयों को अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) प्राप्त है जब निवेशक भारत से एक्सेस या लेनदेन करते हैं। भले ही एक्सचेंज विदेश में रजिस्टर्ड हों।
अब तक निवेशक केवल “प्लेटफॉर्म यूजर” माने जाते थे, लेकिन इस फैसले के बाद वे कानूनी मालिक (legal owners) माने जाएंगे। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक अलय रजवी, मैनेजिंग पार्टनर, Accord Juris ने कहा कि क्रिप्टो को संपत्ति मानने से निवेशक अब केवल यूजर्स नहीं, बल्कि मालिक बन गए हैं जिनके पास लागू करने योग्य अधिकार (enforceable claims) हैं।
अब निवेशक एक्सचेंज को टोकन फ्रीज करने या पुनर्वितरित करने से रोकने के लिए न्यायालय से आदेश (injunction) मांग सकते हैं, अपने होल्डिंग्स की वापसी (restitution) की मांग कर सकते हैं और यह तर्क दे सकते हैं कि ट्रस्ट में रखी गई संपत्तियां दिवालियापन (liquidation) की प्रक्रिया से बाहर रखी जाएं। मद्रास हाई कोर्ट ने WazirX को निर्देश दिया कि वह यूजर के XRP टोकन की कीमत को एस्क्रो खाते (escrow account) में जमा करे जब तक कि मध्यस्थता (arbitration) पूरी न हो जाए। यह दिखाता है कि अदालतें अब निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रही हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक आशुतोष के श्रीवास्तव, पार्टनर, SKV Law Offices ने कहा कि यह फैसला भारत में क्रिप्टो धारकों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। उन्होंने बताया कि क्रिप्टो को संपत्ति मानने से अब निवेशकों को इंजंक्शन, ट्रस्ट क्लेम जैसी मौजूदा कानूनी सुरक्षा मिलेगी और साथ ही यह इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के तहत पहले से परिभाषित टैक्स व्यवस्था को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट ने क्रिप्टो को संपत्ति के रूप में मान्यता दी, तो इससे सरकार की यह स्थिति भी मजबूत हुई कि ऐसे डिजिटल एसेट्स को टैक्स के लिए घोषित किया जाना चाहिए।
यह फैसला निवेशकों के अधिकारों को मजबूत करता है, लेकिन साथ ही नियामक सुधार (regulatory reform) की जरुरत को भी उजागर करता है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक एडुल पटेल, CEO, Mudrex ने कहा कि यह फैसला स्वामित्व अधिकार और कानूनी उपायों को स्पष्ट करता है, लेकिन भारत को अब क्रिप्टो को सिर्फ एक संपत्ति मानने से आगे बढ़ना होगा और इसे इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली तकनीक के रूप में देखना चाहिए। हालांकि यह निर्णय किसी समर्पित क्रिप्टो नियमन कानून का विकल्प नहीं है, लेकिन यह न्यायिक आधार (judicial foundation) प्रदान करता है जो भारत के डिजिटल एसेट इकोसिस्टम में निवेशक सुरक्षा और जवाबदेही को नया रूप देगा।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको किसी निवेश करना है तो एक्सपर्ट से संपर्क करें।)