ईरान-इजरायल संकट के बीच भारत में रसोई गैस की किल्लत को लेकर फैल रही अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में स्पष्ट किया कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन 'पैनिक बुकिंग' (घबराहट में बुकिंग) और जमाखोरी को रोकने के लिए बुकिंग और डिलीवरी के नियमों में कई अहम बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सप्लाई चेन सुरक्षित रहे और गैस सिलेंडर उन लोगों तक पहले पहुंचे जिन्हें इसकी वास्तव में जरूरत है। इन नए नियमों का सीधा असर देश के करोड़ों घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है।
गांव और शहरों में बदला नियम
नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव बुकिंग के अंतराल (Booking Gap) को लेकर किया गया है। अब शहरी इलाकों में रहने वाले उपभोक्ता एक सिलेंडर मिलने के कम से कम 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर सकेंगे। वहीं, ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह समय सीमा बढ़ाकर 45 दिन कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कुछ जगहों पर डिस्ट्रीब्यूटर्स और ग्राहकों द्वारा गैस सिलेंडर जमा करने की प्रवृत्ति देखी गई है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो रही थी। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि वर्तमान में सिलेंडर बुक करने से लेकर घर तक पहुंचने का औसत समय अभी भी मात्र 2.5 दिन है, इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह नई व्यवस्था केवल उन लोगों को रोकने के लिए है जो जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करना चाहते हैं।
अब 45 दिन में मिलेगा सिलेंडर
पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार की तरफ से उठाए गए कुछ कदमों से घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 28 प्रतिशत बढ़ गया है। इसके अलावा विदेशों से वैकल्पिक स्रोतों से भी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने सीमित स्तर पर वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री की अनुमति दी है, ताकि कुल मांग के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा, ’’इसके लिए राज्य सरकारों को वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करनी होगी।’’
शर्मा ने कहा कि घबराहट के कारण एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अचानक बढ़ गई है। उन्होंने लोगों से घबराहट में अतिरिक्त बुकिंग से बचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मांग को नियंत्रित करने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की अगली बुकिंग की न्यूनतम अवधि 45 दिन कर दी गई है, जबकि पिछले हफ्ते ही इस अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया था। शहरी क्षेत्रों के लिए यह सीमा अब भी 25 दिन है।
OTP के बिना नहीं मिलेगी डिलिवरी
सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए सरकार अब 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी तक यह सिस्टम देश के लगभग 50% उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 90% तक किया जा रहा है। इस नियम के तहत, जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर आएगा, तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा। बिना इस कोड को बताए सिलेंडर की डिलीवरी सिस्टम में दर्ज नहीं होगी। इस कदम से गैस की कालाबाजारी, हेरफेर और गलत तरीके से होने वाली सप्लाई पर पूरी तरह से रोक लग सकेगी। ग्राहकों को अब अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखने की सलाह दी गई है ताकि डिलीवरी के समय कोई असुविधा न हो।
वहीं, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर के लिए इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों पर भी नई पाबंदी लगाई गई है। तेल कंपनियां अब कमर्शियल एलपीजी की औसत मासिक मांग का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित करेंगी। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया कि इस लिमिट का मकसद होटल-रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि सिलेंडरों की अवैध बिक्री और जमाखोरी को रोकना है। चूंकि कमर्शियल एलपीजी पर कोई सब्सिडी नहीं होती और इसके लिए पहले कोई सख्त रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं था, इसलिए इसकी खुली बिक्री से घरेलू सिलेंडर के अवैध डायवर्जन का खतरा बढ़ जाता है। इस 20% की लिमिट से बाजार में गैस की उपलब्धता का संतुलन बना रहेगा।
