बिजनेस

Repo Rate News: बढ़ सकती है रेपो रेट, यूनियन बैंक का दावा, लोन होंगे महंगे!

Repo Rate News: यूनियन बैंक के अनुसार आरबीआई भारी विदेशी मुद्रा और बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दिसंबर से रेपो रेट बढ़ा सकता है।

Image

दिसंबर से फिर शुरू हो सकता है ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर

Photo : iStock

Repo Rate News : यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (H2 FY27) में रेपो रेट बढ़ा सकता है। मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ती महंगाई और बैंकिंग प्रणाली में बहुत ज्यादा नकदी (लिक्विडिटी) को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला फिर से शुरू कर सकता है। अनुमान है कि आरबीआई रेपो रेट को मौजूदा 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.75 से 6 प्रतिशत तक ले जा सकता है। इससे लोन लेना महंगा हो सकता है।

दिसंबर से शुरू हो सकता है बढ़ोतरी का दौर

रिपोर्ट के अनुसार रेपो रेट में बढ़ोतरी का यह सिलसिला इस साल दिसंबर महीने से शुरू होने की सबसे अधिक संभावना है। यूनियन बैंक का मानना है कि केंद्रीय बैंक 25-25 बेसिस पॉइंट्स की दो से तीन बार बढ़ोतरी कर सकता है। अगर वैश्विक परिस्थितियां अधिक प्रतिकूल रहती हैं, तो पहला झटका दिसंबर में ही देखने को मिल सकता है।

अक्टूबर में भी दरें बढ़ाने की गुंजाइश

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक यूनियन बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में अपनी ब्याज दरें बढ़ाता है और आरबीआई भारत में टिकाऊ उपायों के जरिए अतिरिक्त कैश को सोख लेता है, तो अक्टूबर में ही रेपो रेट बढ़ाया जा सकता है।

विदेशी मुद्रा के भारी प्रवाह से कैश की भरमार

आरबीआई की विशेष स्वैप सुविधा के तहत देश में विदेशी मुद्रा का भारी प्रवाह हुआ है। 31 अगस्त तक यह आंकड़ा करीब 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें से 127.23 अरब डॉलर का बड़ा हिस्सा FCNR(B) जमाओं के जरिए आया है, जबकि बाकी राशि विदेशी मुद्रा उधारियों से मिली है। इस भारी विदेशी पूंजी के आगमन से भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में रुपए की कैश अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है।

बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी लिक्विडिटी की चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक जून के मध्य में बैंकिंग प्रणाली की कोर लिक्विडिटी 4.82 लाख करोड़ रुपए थी, जो अगस्त के मध्य तक बढ़कर 8.05 लाख करोड़ रुपए हो गई। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि सितंबर के दूसरे हफ्ते तक यह कोर नकदी बढ़कर करीब 14.17 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच सकती है। डॉलर के भारी आगमन के बाद अब बाजार में मौजूद अत्यधिक रुपए को संभालना आरबीआई के लिए एक बड़ी नीतिगत चुनौती बन गया है।

अतिरिक्त कैश निकालने के लिए आरबीआई के उपाय

यूनियन बैंक को उम्मीद है कि अक्टूबर की नीतिगत बैठक से पहले ही केंद्रीय बैंक बाजार से इस अतिरिक्त नकदी को बाहर निकालने के लिए कुछ बड़े कदम उठा सकता है। इसके लिए वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) और इंक्रीमेंटल कैश रिजर्व रेशियो (I-CRR) जैसे उपायों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक बॉन्ड बिक्री और फॉरेक्स स्वैप का सहारा भी ले सकता है।

महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलती हैं, तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है और रुपए पर दबाव गहरा सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक को सख्त कदम उठाने ही होंगे। हालांकि, अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं और वैश्विक बाजार स्थिर होता है, तो आरबीआई को मौद्रिक नीतियों को लचीला बनाए रखने में थोड़ी राहत मिल सकती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article