मैजिकब्रिक्स की एक लेटेस्ट रिसर्च के अनुसार, इस वर्ष 2025 में बड़े मेट्रो शहरों और प्रमुख टियर-2 शहरों में भारतीय घर खरीदार, किराएदार और पेइंग गेस्ट घरों को लेकर लाइफस्टाइल फैक्टर को ध्यान में रख कर इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित फैसले ले रहे हैं। लंबे समय तक रहने लायक माहौल, कनेक्टिविटी और माइक्रो-मार्केट की क्वालिटी को लेकर बढ़ती जागरूकता रेजिडेंशियल प्रिफरेंस को एक नया आकार दे रही है।
लग्जरी हाउसिंग की मजबूत मांग
लग्जरी हाउसिंग की मांग मजबूत बनी हुई है। मैजिकब्रिक्स डेटा से जानकारी मिलती है कि 75 से 80 प्रतिशत घर खरीदार द्वारका एक्सप्रेसवे, नोएडा एक्सप्रेसवे, सरजापुर रोड, गाचीबोवली और कोरेगांव पार्क जैसे कुछ प्रीमियम माइक्रो-मार्केट में लग्जरी सेगमेंट में घरों की मांग कर रहे हैं, जिन्हें नए हाई-एंड रेजिडेंशियल पिन कोड के आने से सपोर्ट मिल रहा है। टियर-1 शहरों में लगभग बराबर बंटवारा दिखता है, जिसमें 51 प्रतिशत खरीदारों की पसंद किफायती होने के कारण मिड-सेगमेंट घरों बने हुए हैं, जबकि 49 प्रतिशत खरीदार अभी भी लग्जरी घरों को पसंद करते हैं।
खरीदारी में लाइफस्टाइल फैक्टर बन रहा अहम
रिपोर्ट के अनुसार, लाइफस्टाइल फैक्टर खरीदारों के खरीदारी से जुड़े फैसले को अधिक प्रभावित कर रहे हैं। एनसीआर और मुंबई में लगभग 35-40 प्रतिशत घर खरीदार ऐसे घरों को पसंद करते हैं, जो सूरज की रोशनी वाली दिशा में बने हैं, जो कि घर खरीदारों की नेचुरल लाइट की जरूरत और सेहत पर बढ़ते जोर को दर्शाता है। कोलकाता में 42 प्रतिशत घर खरीदार गंगा के किनारे वाले घर को खरीदने की इच्छा रखते हैं।
मुंबई में 41 प्रतिशत खरीदार G+5 मंजिल या उससे ऊंची टावरों को पसंद करते हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में, 30-37 प्रतिशत खरीदार ऊंची इमारतों वाली डेवलपमेंट के लिए तैयार हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाली ग्रोथ भरोसे का कारण
रिपोर्ट बताती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाली ग्रोथ भरोसे का कारण बन रही है। अहमदाबाद और हैदराबाद में लगभग 30-35 प्रतिशत घर खरीदार आने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से सपोर्टेड नई जगहों में निवेश कर रहे हैं। वहीं, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और बेंगलुरु में 70-73 प्रतिशत खरीदार कम से कम दो पार्किंग स्पेस चाहते हैं।
किराए को लेकर स्पीड और फ्लेक्सिबिलिटी व्यवहार को आकार दे रहे हैं। कोलकाता और अहमदाबाद में लगभग 50 प्रतिशत किराएदार तुरंत रहने के विकल्प पसंद करते हैं, जबकि बेंगलुरु और मुंबई में 20-23 प्रतिशत किराए की खोज लगभग तीन महीने पहले शुरू की जाती है, जो जल्दबाजी और प्लान करके किराए पर लेने के बीच एक स्पष्ट अंतर को दिखाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मालिकाना हक की पसंद अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग है, मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे और पुणे में 40-50 प्रतिशत खरीदार रीसेल घरों को चुनते हैं, जबकि अहमदाबाद, हैदराबाद और नई दिल्ली में 63-67 प्रतिशत खरीदार नए प्रोजेक्ट लॉन्च की ओर अपना झुकाव रखते हैं।
चेन्नई और बेंगलुरु किराए की खोज में सबसे आगे
रिसर्च में किराए और पीजी की मांग को लेकर लाइफस्टाइल की प्रिफरेंस के बढ़ते असर पर भी जोर दिया गया है। चेन्नई और बेंगलुरु मिलकर भारत की कुल किराए की खोज का लगभग 50 प्रतिशत हिस्से को लेकर अपना योगदान देते हैं, जिसमें बेंगलुरु में 26 प्रतिशत किराएदार लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने वाले रेजिडेंशियल ऑप्शन को प्राथमिकता देते हैं। रेंटल डेमोग्राफिक्स बाजार के हिसाब से अलग-अलग हैं, जैसे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बैचलर अधिक हैं, जबकि ठाणे और चेन्नई में परिवारों की मांग अधिक देखी गई है।
