कच्चे तेल में लगी आग से महंगाई बढ़ने की रफ्तार बरकरार है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गई, जो करीब 20 महीने का उच्चतम स्तर है। जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। महंगाई बढ़ने का सीधा असर लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। खाने-पीने के सामान महंगे होने से रसोई का बजट पहले से बढ़ा हुआ है। अब आने वाले महीनों में महंगे कर्ज से परेशानी और बढ़ सकती है।
दरअसल, बढ़ते महंगाई को रोकने के लिए आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। SBI की ‘इकोरैप’ (Ecowrap) रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, लगातार बढत्रती महंगाई को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। रिपोर्ट में अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना है। इसके बाद दिसंबर में भी 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी हो सकती है।
अगर RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI पर होगा। अब सवाल है कि अगर रेपो रेट में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होती है, तो आपकी EMI पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।
RBI के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर महंगाई
RBI के लिए कानूनी तौर पर CPI महंगाई दर को 2-6% के दायरे में रखते हुए 4% पर बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, यह लगातार तीसरा महीना है जब हेडलाइन रिटेल महंगाई दर 4% से ऊपर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब आरबीआई के पास महंगाई को काबू करने के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी के अलावा कोई दूसरा तरीका नहीं है। इसके चलते जानकार भी रेपो रेट में बढ़ोतरी की बात कह रहे हैं।
कब है आरबीआई की पॉलिसी?
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की अगली बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होगी। SBI की ताजा ‘इकोरैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए RBI अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद दिसंबर में भी 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी संभव है। बता दें कि अगस्त में RBI ने लगातार चौथी मॉनेटरी पॉलिसी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था।
रेपो रेट बढ़ा तो EMI पर क्या असर?
रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक RBI से पैसा उधार लेते हैं। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर EMI पर पड़ सकता है। नए ग्राहकों के लिए भी लोन महंगा हो सकता है।
₹50 लाख के होम लोन पर कितना बढ़ेगा बोझ?
| स्थिति | ब्याज दर | मासिक EMI |
|---|---|---|
| अभी | 7.50% | ₹40,280 |
| 0.25% बढ़ने पर | 7.75% | ₹41,047 |
| अंतर | +0.25% | ₹767/माह ज्यादा |
अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद होम लोन पर ब्याज दर 7.75% हो जाती है, तो EMI बढ़कर करीब ₹41,047 हो जाएगी।
यानी सिर्फ 0.25% ब्याज बढ़ने से EMI करीब ₹767 प्रति माह बढ़ेगी। अगर पूरी 20 साल की अवधि तक यही दर रहती है, तो करीब ₹1.84 लाख अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा।
ईमआई का बढ़ेगा बोझ
FD वालों के लिए अच्छी खबर
रेपो रेट बढ़ने का असर सिर्फ कर्ज लेने वालों पर नहीं पड़ता। इसका फायदा FD में पैसा रखने वाले निवेशकों को भी मिल सकता है। जब RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान जमा पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। ऐसे में नई FD कराने वाले लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिल सकता है।
कोविड के दौरान RBI ने कई पॉलिसी रिव्यू में रेपो रेट में कुल 115 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 4 फीसदी तक कर दिया था। उस समय FD की ब्याज दरों में भी गिरावट आई थी। बाद में जब महंगाई बढ़ी और RBI ने दरें बढ़ानी शुरू कीं, तो FD रेट में भी सुधार देखने को मिला।
