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Gold Prices: वैश्विक तनावों के बीच सोने की 'चमक' कायम रहेगी या नहीं, एक्सपर्ट्स ने कही बड़ी बात

Gold Prices: डॉलर के वैश्विक प्रभाव में कमी, बढ़ते राजकोषीय दबाव और भू-राजनीतिक तनावों के चलते वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बड़े बदलाव दिख रहे हैं। इन हालात में सोना सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत बनकर उभरा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीमित आपूर्ति और बढ़ती मांग के कारण सोने का दीर्घकालिक रुख सकारात्मक रहेगा और कीमतों में तेजी जारी रह सकती है।

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क्या आने वाले समय में सोने की कीमतों और इजाफा होगा? (तस्वीर-istock)

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Gold Prices: दुनिया की वित्तीय व्यवस्था इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिकी डॉलर का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है, कई देशों पर राजकोषीय दबाव बढ़ रहा है और अलग-अलग क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव भी तेज हो रहे हैं। इन परिस्थितियों में सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत होकर उभरा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक ब्रोकरेज कंपनी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लि. (MOFSL) की तिमाही रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने का दीर्घकालिक रुख सकारात्मक बना हुआ है और आने वाले समय में इसमें तेजी जारी रह सकती है।

5,000 डॉलर के पार पहुंचा सोना

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में सोने की कीमत 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है। इसे आधुनिक इतिहास की सबसे मजबूत लंबी तेजी में से एक माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि सोना अब केवल सामान्य चक्रीय तेजी में नहीं है, बल्कि यह एक नए सुपरसाइकल यानी लंबे समय तक चलने वाले बड़े तेजी के दौर में प्रवेश कर चुका है। इसका मतलब है कि कीमतों में बढ़ोतरी कुछ महीनों या एक-दो साल की नहीं, बल्कि लंबे समय तक जारी रह सकती है। MOFSL का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कॉमेक्स बाजार में सोने की कीमत लगभग 6,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर हो सकती है। भारतीय बाजार में यह कीमत करीब 1.85 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है। अगर वैश्विक तनाव और राजकोषीय संकट और बढ़ते हैं, तो मध्यम अवधि में सोना 7,500 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकता है।

डॉलर से दूरी, सोने की ओर झुकाव

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कंपनी के जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी के अनुसार, दुनिया के कई देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार को केवल डॉलर आधारित परिसंपत्तियों में रखने के बजाय विविधता ला रहे हैं। वे सोने जैसी संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इससे सोने की मांग में स्थायी बढ़ोतरी देखी जा रही है। उनका कहना है कि भौतिक सोने की आपूर्ति सीमित है, इसलिए कीमतें 5,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास और उससे ऊपर बनी रह सकती हैं। दमानी ने यह भी कहा कि सोने की मौजूदा तेजी सिर्फ महंगाई के कारण नहीं है। यह राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों में लोगों के घटते भरोसे का भी परिणाम है। जब निवेशकों को लगता है कि सरकारों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है या केंद्रीय बैंकों की नीतियां अस्थिर हैं, तो वे सोने को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।

सकारात्मक ब्याज दरों के बावजूद मजबूती

आमतौर पर जब वास्तविक ब्याज दरें सकारात्मक होती हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है, क्योंकि निवेशक ब्याज देने वाले साधनों की ओर रुख करते हैं। लेकिन 2023 से 2025 के बीच ऐसा नहीं हुआ। सकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी जारी रही। कंपनी के विश्लेषक मानव मोदी के मुताबिक, यह निवेशकों की सोच में बड़े बदलाव का संकेत है। अब लोग मानने लगे हैं कि वास्तविक रिटर्न अस्थायी हो सकते हैं और नीतियों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में सोना रखने की लागत कम लगती है और यह वित्तीय जोखिमों से बचाव का मजबूत साधन बन जाता है।

बढ़ते वैश्विक तनाव का असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वी यूरोप, पश्चिम एशिया और एशिया के कई हिस्सों में बढ़ते तनाव ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। व्यापारिक टकराव, शुल्क संबंधी विवाद और आपूर्ति सीरीज में बाधाओं के कारण महंगाई और मुद्रा में अस्थिरता बढ़ी है। इन हालात में निवेशक ऐसी संपत्ति चाहते हैं जो किसी एक देश या सरकार पर निर्भर न हो। सोना इस जरूरत को पूरा करता है। जैसे-जैसे सरकारों पर कर्ज और खर्च का दबाव बढ़ रहा है और मौद्रिक स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं, सोना एक “गैर-सरकारी मुद्रा” के रूप में ज्यादा अहम होता जा रहा है। इससे इसकी मांग में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

सीमित आपूर्ति और बढ़ती मांग

सोने की कीमतों को ऊंचा बनाए रखने में आपूर्ति पक्ष की भी बड़ी भूमिका है। खदानों से उत्पादन में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो रही है। कई प्रमुख बाजारों में भंडार घट रहे हैं और उत्पादन लागत बढ़ रही है। इससे वैश्विक स्तर पर भौतिक सोने की उपलब्धता सीमित बनी हुई है। घरेलू बाजार में भी सोने की मांग मजबूत है। रुपये में कमजोरी के कारण आयात महंगा हुआ है, लेकिन खुदरा खरीदारों की लिवाली जारी है। त्योहारों और शादियों के मौसम में भी मांग में तेजी देखी जा रही है।

केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वे हर साल लगभग 1,000 टन सोना अपने भंडार में जोड़ रहे हैं। इसका मकसद डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर निर्भरता कम करना और भंडार में विविधता लाना है। यह रुझान आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, भंडार में विविधता, सीमित आपूर्ति, वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की बदलती सोच जैसे कई कारक सोने को मजबूत समर्थन दे रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि सोना लंबे समय तक निवेशकों के पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभाता रहेगा और इसकी कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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