ITR filing: वित्त वर्ष 2025-26 और असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फॉर्म जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है। इस बार इनकम टैक्स भरने की डेडलाइन 31 जुलाई तय की गई है। इसके बाद रिटर्न भरने पर पेनल्टी देना होगा। अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं या पहली बार भरने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। बता दें कि पिछले कुछ सालों में, इनकम-टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना ज्यादा आसान हो गया है, क्योंकि अब यह पूरी प्रक्रिया इनकम-टैक्स वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध है। हालांकि, ऐसी कई चीजें हैं जो पहली बार टैक्स देने वालों के लिए थोड़ी उलझन भरी हो सकती हैं। आज हम उन अलग-अलग वजहों पर नजर डालेंगे जिनकी वजह से आपको I-T का नोटिस मिल सकता है।
इनकम-टैक्स नोटिस क्या है?
यह IT विभाग की ओर से एक आधिकारिक सूचना होती है। यह सूचना आपकी बिना बताई गई आय, आपकी ITR फाइलिंग में किसी तरह की गड़बड़ी, रिटर्न फाइल न करना, दावों का सत्यापन, अधूरी जानकारी या देर से फाइलिंग और बकाया इनकम टैक्स की मांग जैसे कारणों से भेजी जाती है। खास बात यह है कि टैक्सपेयर्स को ऐसे नोटिस, अपने रिटर्न फाइल करने से पहले और बाद में दोनों ही समय मिल सकते हैं। आयकर विभाग लिंक्ड ईमेल एड्रेस पर नोटिस भेजता है।
किन गलतियों पर मिल सकता है नोटिस?
- ITR फाइल न करना
- रिटर्न फाइल करते समय गलत ITR फॉर्म का इस्तेमाल करना
- ITR में TDS की गलत या गलत तरीके से बताई गई रकम
- ITR में वित्तीय / असेसमेंट ईयर के दौरान किसी भी आय की जानकारी न देना।
- ITR के साथ जरूरी कागजात जमा नहीं करना।
- ITR में वित्तीय/असेसमेंट ईयर के दौरान कैपिटल गेन्स की जानकारी न देना या गलत जानकारी देना।
- खुद, पति/पत्नी या बच्चों के लिए किए गए निवेश की सही जानकारी न देना।
- ITR में वित्त वर्ष/असेसमेंट ईयर के दौरान ज्यादा कीमत वाले लेन-देन की जानकारी न देना।
टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार, अगर कोई रिटर्न भरने में ऊपर दी गई जानकारी छुपाता है या गलत जानकारी देता है तो उसे आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिल सकता है। इसलिए रिटर्न भरने से पहले सभी जरूरी कागजात और जानकारी जुटा लें। उसके बाद सही जानकारी के साथ रिटर्न भरें। ऐसा करने से बाद में कोई परेशानी भी नहीं होगी और आयकर विभाग से नोटिस मिलने का चांस भी नहीं बचेगा।
कुल टैक्सेबल आय क्या है?
आपकी कुल टैक्सेबल आय की गणना सैलरी और दूसरे स्रोतों (जैसे बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और शेयर वगैरह) से हुई कुल कमाई में से, आपके द्वारा किए गए किसी भी टैक्स-बचत कटौती को घटाकर की जाती है। ऐसी कटौतियों में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), इंश्योरेंस में किया गया निवेश, या लोन और किराए के लिए किए गए पेमेंट शामिल हैं।
किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी?
फॉर्म 16 की जगह इस बार फॉर्म 130 (आपके मौजूदा एम्प्लॉयर से, और अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है तो पिछले एम्प्लॉयर से भी), PAN कार्ड, Aadhaar कार्ड (PAN-Aadhaar लिंक होना जरूरी है), और निवेश के सबूत (जिनमें बैंक जमा, PPF जमा वगैरह शामिल हैं), होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट, और इंश्योरेंस प्रीमियम पेमेंट की रसीदें।
