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Explainer: 22800 के नीचे निफ्टी ! क्या शुरू हो गई मंदी? जानें 5 बड़े सपोर्ट और कहां बनेगा बॉटम?

Nifty Prediction: भारतीय बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 22,800 के अहम सपोर्ट लेवल से नीचे लुढ़क गया है। 26 फरवरी के बाद से निफ्टी महज 16 ट्रेडिंग सेशन में 10% के करीब फिसल चुका है। क्या बाजार में मंदी आ चुकी है? निफ्टी अब और कितना नीचे जाएगा?

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बाजार में गहराती जा रही बिकवाली

Nifty support levels: निफ्टी के 22,800 के नीचे आने के बाद बाजार का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल गया है और अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि गिरावट कहां जाकर रुकेगी। टेक्निकल लेवल, वैल्यूएशन और एक्सपर्ट राय मिलाकर देखें तो 20,500 तक का रास्ता खुला दिख रहा है।

निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था, बल्कि यह शॉर्ट टर्म ट्रेंड का अहम सपोर्ट था। इसके टूटने के बाद बाजार ने यह संकेत दे दिया है कि अब गिरावट सीमित नहीं है और इंडेक्स एक नए लोअर ट्रेंड में प्रवेश कर चुका है। हाल के दिनों में जिस तरह से तेजी के दौरान बने सपोर्ट एक-एक कर टूटे हैं, उससे साफ है कि खरीदारी की ताकत कमजोर हुई है और बिकवाली हावी है।

मार्केट एक्सपर्ट कुनाल शाह का मानना है कि बाजार अब एक नई रेंज में शिफ्ट हो रहा है, जहां 23,000 के ऊपर टिकना मुश्किल और नीचे की गुंजाइश ज्यादा है। उनके मुताबिक 22,800 के बाद गिरावट का अगला चरण 22,000 की ओर खुल सकता है। शाह का कहना है कि 22,800 के नीचे आते ही बाजार के लिए पहला संभावित सपोर्ट 22,500–22,400 के जोन में दिखाई देता है। यह वह स्तर है जहां हाल की ट्रेडिंग एक्टिविटी और ऑप्शन पोजिशनिंग ने कुछ डिमांड दिखाई है।

आमतौर पर तेज गिरावट के दौरान बाजार इस तरह के जोन पर थोड़ी राहत या पुलबैक देता है, लेकिन अगर बिकवाली का दबाव बना रहता है तो यह सपोर्ट ज्यादा देर तक टिक नहीं पाता। यह जोन इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां से शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स अपनी पोजिशन एडजस्ट करते हैं, जिससे अस्थायी स्थिरता आ सकती है।

22,100: मिड-टर्म ट्रेंड का असली टेस्ट

अगर निफ्टी 22,500 के नीचे टिकता है, तो अगला बड़ा सपोर्ट 22,100 के आसपास आता है। यह स्तर तकनीकी रूप से मजबूत माना जाता है, क्योंकि यह फिबोनाची 38.2% रिट्रेसमेंट के करीब बैठता है। इतिहास बताता है कि बुल मार्केट के करेक्शन में यह लेवल अक्सर पहला बड़ा ब्रेक पॉइंट होता है। यानी अगर बाजार यहां रुकता है, तो इसे हेल्दी करेक्शन माना जा सकता है, लेकिन अगर यह स्तर भी टूट जाता है तो गिरावट गहरी होने का संकेत मिलता है।

21,700 का जोन: चैनल सपोर्ट और बॉटम की शुरुआत

निफ्टी के चार्ट स्ट्रक्चर को देखें तो 21,800–21,700 का जोन बेहद अहम बन जाता है। यह एक तरह से डाउनवर्ड चैनल का लोअर बाउंड है, जहां बाजार को तकनीकी सपोर्ट मिलने की संभावना रहती है। अगर बाजार इस स्तर तक पहुंचता है तो यहां वोलैटिलिटी बढ़ सकती है और “बॉटम फॉर्मेशन” की शुरुआती कोशिश दिखाई दे सकती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि बॉटम तुरंत बन जाए, लेकिन यह जोन गिरावट की रफ्तार को धीमा कर सकता है।

21,300–21,200: सेंटीमेंट का ब्रेकडाउन लेवल

इस स्तर को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह पिछले कंसोलिडेशन और प्राइस क्लस्टर का एरिया है। अगर बाजार यहां तक गिरता है, तो इसका मतलब होगा कि करेक्शन अब सिर्फ टेक्निकल नहीं बल्कि सेंटीमेंट-ड्रिवन हो चुका है। इस जोन के आसपास निवेशकों का भरोसा डगमगाता है और डर का माहौल बनता है, जो अक्सर बड़े बॉटम से पहले देखने को मिलता है।

20,800–20,500: क्या यही होगा रियल बॉटम

निफ्टी के लिए 20,800–20,500 का जोन सबसे मजबूत लॉन्ग टर्म सपोर्ट माना जा रहा है। यह 50% फिबोनाची रिट्रेसमेंट के करीब बैठता है और ऐतिहासिक रूप से बड़े करेक्शन इसी तरह के गहरे स्तरों पर जाकर थमते हैं। अगर बाजार इस जोन तक आता है, तो वैल्यूएशन भी काफी आकर्षक हो जाएंगे, जिससे लॉन्ग टर्म निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। यही कारण है कि कई एक्सपर्ट इसे संभावित “रियल बॉटम जोन” मान रहे हैं।

एक्सपर्ट की रणनीति: जल्दबाजी नहीं, धैर्य जरूरी

ट्रस्ट म्यूचुअल फंड के CIO मिहिर वोरा का मानना है कि मौजूदा बाजार में अनिश्चितता बहुत ज्यादा है और ऐसे समय में आक्रामक फैसले लेने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि आने वाले हफ्तों में बेहतर निवेश के मौके मिलेंगे, लेकिन इसके लिए धैर्य और कैश बनाए रखना जरूरी है। वे साफ कहते हैं कि निवेश एकमुश्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से करना चाहिए, क्योंकि बाजार का बॉटम एक प्रक्रिया में बनता है, किसी एक दिन में नहीं।

गिरावट में निवेश का सही तरीका

वोरा कहते हैं मौजूदा हालात में सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि निवेशक गिरावट को तुरंत खत्म मान लें। बाजार में अभी भी वोलैटिलिटी बनी हुई है और ग्लोबल फैक्टर्स का असर जारी है। ऐसे में धीरे-धीरे निवेश करना, कैश मैनेजमेंट करना और मजबूत कंपनियों पर फोकस रखना ज्यादा समझदारी है। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए बाजार में बने रहना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक अवसर बन सकती है, लेकिन केवल तभी जब वे सही रणनीति के साथ आगे बढ़ें।

कहां बनेंगे अगले 5 सपोर्ट लेवल?

निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर टूटना एक बड़ा संकेत है कि बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। 22,500 से लेकर 20,500 तक कई सपोर्ट जोन मौजूद हैं, लेकिन असली मजबूती 21,000–22,000 के बीच ही देखने को मिल सकती है। जब तक बाजार इस जोन में स्थिर नहीं होता, तब तक यह मानना बेहतर होगा कि गिरावट का दौर जारी है। हालांकि, यही गिरावट आगे चलकर निवेश का मजबूत आधार भी तैयार कर सकती है।चार्ट स्ट्रक्चर, फिबोनाची और पिछले स्विंग लो को मिलाकर देखें, तो नीचे की तरफ सपोर्ट “क्लस्टर” में बनते हैं, यानी एक-एक लेवल नहीं बल्कि जोन में बाजार रुकने की कोशिश करता है।

पहला पड़ाव : 22,500–22,400 यह शॉर्ट टर्म डिमांड जोन है जहां हाल की ट्रेडिंग एक्टिविटी और ऑप्शन डेटा सपोर्ट दिखाते हैं। अगर बाजार तेज गिरावट में हो तो यहां हल्की राहत या पुलबैक देखने को मिल सकता है।

दूसरा मजबूत सपोर्ट: 22,100 का स्तर तकनीकी रूप से बेहद अहम है क्योंकि यह मिड-टर्म फिबोनाची 38.2% रिट्रेसमेंट के करीब बैठता है। आमतौर पर बुल मार्केट करेक्शन का पहला बड़ा ठहराव यहीं आता है।

तीसरा क्रिटिकल जोन: 21,800–21,700 का यह चैनल का लोअर बाउंड और चार्ट बेस सपोर्ट एरिया है। अगर बाजार यहां आता है तो वोलैटिलिटी बढ़ेगी और “बॉटम फॉर्मेशन” की शुरुआती कोशिश यहीं दिख सकती है।

चौथा बड़ा सपोर्ट: 21,300–21,200 का यह जोन पिछले कंसोलिडेशन और प्राइस क्लस्टर का एरिया है। अगर गिरावट इस स्तर तक जाती है तो यह संकेत होगा कि करेक्शन गहरा हो चुका है और सेंटीमेंट काफी कमजोर है।

पांचवां और सबसे अहम सपोर्ट: 20,800–20,500 का है। यह 50% फिबोनाची रिट्रेसमेंट और लॉन्ग टर्म स्ट्रक्चरल सपोर्ट है। बड़े बॉटम अक्सर इसी तरह के गहरे रिट्रेसमेंट के आसपास बनते हैं, इसलिए यह “रियल बॉटम जोन” माना जा रहा है।

निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल

निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल

प्रैक्टिकली बॉटम खोजना मुश्किल

मार्केट एक्सपर्ट संदीप जैन का कहना है कि फिलहाल बाजार जिस तरह से मूव कर रहा है, उस स्थिति में प्रैक्टिकल नजरिये से सपोर्ट या बॉटम देख पाना संभव नहीं है। क्योंकि मार्केट पश्चिम एशिया के हालात के मुताबिक गैप अप और गैप डाउन रिएक्ट कर रहा है। इस स्थिति में बाजार को प्रेडिक्ट नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह टेक्निकल ड्रिवन मोमेंटम में नहीं है, बल्कि सेंटिमेंट्स के हिसाब से रिएक्शनरी मोड में है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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