ईरान की करेंसी अब तक के सबसे निचले स्तर पर, 1 डॉलर = 15 लाख रियाल, तो कितने भारतीय रुपये के बराबर
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 28, 2026, 07:04 AM IST
Iranian Rial vs US Dollar vs Indian Rupee : ईरान की करेंसी, रियाल देश की आर्थिक समस्याओं के कारण हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरकर USD 1 के मुकाबले 1.5 मिलियन के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। जानिए अब कितने भारतीय रुपया के बराबर रह गया है।
ईरान में महंगाई और करेंसी संकट से भड़का जनआक्रोश (तस्वीर-istock)
Iranian Rial vs US Dollar vs Indian Rupee : ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। देश की मुद्रा रियाल गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। मंगलवार को बाजार में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 15 लाख रियाल तक पहुंच गई। भारतीय रुपया से तुलना करें तो 1 इरानी रियाल मात्र 0.000084 भारतीय रुपया के बराबर है यानी 1 भारतीय रुपया 11,951.69 ईरानी रियाल के बराबर है। एक्सचेंज दुकानों ने यह रेट दिया क्योंकि ईरान अभी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, खासकर अपने परमाणु कार्यक्रम पर, और सरकारी अधिकारियों के कुप्रबंधन से जूझ रहा है। इसी आर्थिक बदहाली के चलते देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए, जब आम लोगों की रोजमर्रा की चीजें उनकी पहुंच से बाहर होने लगीं। महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की नीतियों से नाराज लोग सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते ये विरोध पूरे देश में फैल गया।
सरकार की सख्त कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने की कोशिश की। इंटरनेट को दो हफ्तों से ज्यादा समय तक बंद रखा गया, जो ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा इंटरनेट ब्लैकआउट माना जा रहा है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अब तक 6,126 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें प्रदर्शनकारी, बच्चे और आम नागरिक भी शामिल हैं। करीब 41,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सरकार और स्वतंत्र आंकड़ों में फर्क
ईरान की सरकार का कहना है कि मौतों की संख्या करीब 3,117 है और बाकी लोगों को वह “आतंकवादी” बता रही है। हालांकि, पहले भी सरकार पर सही आंकड़े छिपाने के आरोप लगते रहे हैं।
जनता की हालत
बीते दस सालों में रियाल की कीमत 32,000 से गिरकर 15 लाख प्रति डॉलर हो गई है। इससे लोगों की जमा पूंजी लगभग खत्म हो चुकी है। सरकार महीने में सिर्फ 7 डॉलर के बराबर सहायता दे रही है, जो महंगाई के सामने बेहद कम है।
आर्थिक दबाव बना सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सबसे बड़ी समस्या उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, खासकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर, हालात और बिगाड़ रहे हैं। अगर आर्थिक हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में ईरान में और बड़े विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
ईरान संकट पर बढ़ता वैश्विक तनाव
ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच अब अंतरराष्ट्रीय तनाव भी बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने अपना ताकतवर युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर मध्य पूर्व भेज दिया है। इससे क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार या सामूहिक फांसी जैसी कार्रवाई की, तो अमेरिका सैन्य कदम उठा सकता है। हालांकि कई खाड़ी देश किसी भी हमले से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, भले ही उनके यहां अमेरिकी सैनिक तैनात हों।
ईरान का जवाब
ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका और इजरायल “आतंकी गुटों” के जरिए हिंसा फैला रहे हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा कि अमेरिकी धमकियां साफ तौर पर युद्ध की ओर इशारा करती हैं।
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