ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती जंग अब सिर्फ मिसाइलों और धमाकों तक सीमित नहीं रह गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस चेतावनी के बाद कि यह संघर्ष एक महीने या उससे ज्यादा खिंच सकता है, वैश्विक व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सोमवार सुबह क्रूड ऑयल की कीमतों में आग लगने के बाद अब आम आदमी पर भी इस जंग का असर पड़ है. भारत के लिए चिंता की बात यह है कि इस युद्ध की आग अब रसोई तक पहुंचने वाली है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के अलावा, भारत से होने वाले चावल, चाय और फलों के एक्सपोर्ट (निर्यात) पर भी ब्रेक लगने का खतरा पैदा हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने सोमवार को उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।
समुद्री रास्ते बंद होने और सप्लाई ठप होने की वजह से आइए जानते हैं कच्चे तेल के अलावा किन किन चीजों पर ईरान इजराइल की जंग का असर पड़ सकता है।
इन चीजों पर पड़ेगा असर
1. Logistics & Shipping Crisis
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से समुद्री ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया है। दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी Maersk ने अपने जहाजों को स्वेज नहर के बजाय 'केप ऑफ गुड होप' (अफ्रीका के नीचे से लंबा रास्ता) से भेजने का फैसला किया है।
इस लंबे रास्ते की वजह से यूरोप और अमेरिका जाने वाले जहाजों को 2 से 3 हफ्ते का अतिरिक्त समय लगेगा। लागत समय बढ़ने से जहाजों का किराया (Freight Cost) और इंश्योरेंस प्रीमियम काफी बढ़ जाएगा, जिससे आयात-निर्यात करने वाली कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
2. खाने-पीने की चीजों पर असर
भारत और ईरान के बीच करोड़ों डॉलर का व्यापार होता है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने ईरान को करीब 1.2 बिलियन डॉलर का सामान भेजा था, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी चावल (747 मिलियन डॉलर) की थी। इसके अलावा केले और चाय का भी बड़ा निर्यात होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में चावल और चाय के एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ेगा। हालांकि, खाड़ी देश 'फूड सिक्योरिटी' के लिए बासमती चावल का स्टॉक जमा करना शुरू कर सकते हैं, जिससे बाद में मांग बढ़ सकती है। फल और सब्जियां समुद्री रास्ता बंद होने से भारतीय ताजे फल और सब्जियों की सप्लाई भी प्रभावित होगी।
3. एयर कार्गो और महंगा ईंधन
सिर्फ समंदर ही नहीं, आसमान भी इस युद्ध की चपेट में है। एयरस्पेस बंद होने की वजह से एयरलाइंस को लंबे और घुमावदार रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। कम सामान, ज्यादा तेल, लंबे रूट की वजह से विमानों को ज्यादा ईंधन ले जाना पड़ रहा है, जिससे वे कार्गो (सामान) कम ले जा पा रहे हैं। इससे हवाई माल ढुलाई की लागत भी बढ़ रही है।
4. क्या भारत में बढ़ेंगे दाम?
भारत में पिछले करीब तीन साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं। कच्चे तेल के दाम $80-$85 के पार जाने से तेल कंपनियों के मुनाफे (मार्जिन) पर असर पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि सरकार वैट (VAT) और इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर जनता पर बोझ डालने से बच सकती है। फिलहाल देश में जरूरी चीजों की कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर यह तनाव लंबा खिंचा तो गैस, फर्टिलाइजर और अन्य कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
