बिजनेस

होर्मुज संकट के बीच रूस से भारत का तेल आयात 90% उछला, अंगोला बना तीसरा बड़ा स्रोत

मार्च में भारत ने रूस से तेल आयात 90% बढ़ाया, जबकि कुल आयात घटा। होर्मुज संकट से LNG और LPG सप्लाई प्रभावित हुई। अफ्रीकी देशों से खरीद बढ़ाकर भारत ने ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया।

Image

क्रूड आयात में रूस का हिस्सा बढ़ा

Hormuz Crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में व्यवधान के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति तेजी से बदली है। मार्च में रूस से तेल आयात 90% बढ़ा, जबकि कुल आयात घटा। गैस सप्लाई पर दबाव ने भारत को नए स्रोतों की तलाश के लिए मजबूर किया।

रूस से आयात में तेज उछाल

मार्च में रेस से भारत का कच्चे तेल का आयात फरवरी के मुकाबले करीब 90% बढ़ गया। यह उछाल ऐसे समय आया जब कुल तेल आयात लगभग 15% घट गया। दरअसल, पश्चिम एशिया से सप्लाई बाधित होने और समुद्री जोखिम बढ़ने के चलते भारत ने तेजी से सस्ते और उपलब्ध रूसी तेल की ओर रुख किया। अमेरिका द्वारा ट्रांजिट में मौजूद प्रतिबंधित तेल की खरीद पर मिली अस्थायी छूट ने भी इस उछाल को गति दी।

होर्मुज संकट से गैस सप्लाई पर गहरा असर

होर्मुज में व्यवधान का सीधा असर भारत की गैस सप्लाई पर पड़ा। मार्च में LPG आयात करीब 40% घटा, जबकि LNG शिपमेंट में भी तेज गिरावट दर्ज हुई। खासतौर पर Qatar से आयात 92% तक गिर गया, जिसकी वजह Qatar Energy की तरफ से घोषित अप्रत्याशित परिस्थितियां (Force Majeure) और लॉजिस्टिक बाधाएं रहीं।

अफ्रीका से बढ़ी खरीद

रूस के अलावा भारत ने अफ्रीकी देशों से भी तेल आयात बढ़ाया। अंगोला (Angola) मार्च में भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा। इसके साथ ही गबॉन (Gabon), घाना (Ghana) और कॉन्गो (Congo) से भी खरीद बढ़ी। हालांकि इन देशों की कुल हिस्सेदारी अभी सीमित है, लेकिन यह भारत की सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन रणनीति को मजबूत संकेत देता है।

पाइपलाइन से मिली आंशिक राहत

मध्य पूर्व के कुछ उत्पादकों ने समुद्री मार्गों की बाधाओं से बचने के लिए पाइपलाइन रूट अपनाए हैं। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) की हबशन-फ़ुजैरा (Habshan-Fujairah) पाइपलाइन के जरिए सप्लाई जारी रही। इससे भारत को सीमित लेकिन जरूरी राहत मिली और क्षेत्र से कुछ मात्रा में तेल की आपूर्ति संभव हो सकी।

आगे की रणनीति में क्या हैं विकल्प

विश्लेषकों के मुताबिक भारत अप्रैल में भी रूस से खरीद जारी रख सकता है। साथ ही ईरान और वेनेजुएला से आयात बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है। यह रणनीति वैश्विक अनिश्चितता के बीच सप्लाई रिस्क को कम करने में मदद करेगी।

घरेलू मोर्चे पर संतुलन बनाने की कोशिश

LPG आयात में गिरावट के बावजूद सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और औद्योगिक उपयोग सीमित करके रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की है। करीब 33 करोड़ से अधिक घरों तक सप्लाई बनाए रखना प्राथमिकता बनी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर असर सीमित रहे।

TNN Business Desk
TNN बिजनेस डेस्क author

TNN बिजनेस डेस्क

और पढ़ें
End of Article