700 अरब डॉलर के पार पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, आखिर कहां से आया इतना पैसा?
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Jan 24, 2026, 09:20 AM IST
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत का फॉरेक्स रिजर्व अब 700 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इस बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के साथ-साथ सोने के भंडार की अहम भूमिका रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतना मजबूत फॉरेक्स रिजर्व देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देता है और वैश्विक झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ाता है।
Rupee Vs Dollar
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर आई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 700 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है, जो एक मजबूत आर्थिक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह उछाल भारत की आर्थिक स्थिति को वैश्विक स्तर पर और भी मजबूत बनाता है। खास बात यह है कि यह स्तर 16 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह के आंकड़ों के हिसाब से दर्ज किया गया है, जब फॉरेक्स रिजर्व में लगभग 14.17 अरब डॉलर की बढ़त देखी गई, जिससे कुल भंडार 701.36 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा और विश्वसनीयता का भी महत्वपूर्ण संकेतक है। इससे पता चलता है कि देश के पास अंतरराष्ट्रीय लेन-देन, आयात और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा मौजूद है। भंडार में वृद्धि का मतलब यह भी है कि RBI के पास रुपये को स्थिर रखने और बाजार में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए पर्याप्त साधन मौजूद हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों मायने रखता है?
विदेशी मुद्रा भंडार वह संपत्ति है जो किसी देश के पास अन्य देशों की मुद्राओं, सोने और अंतरराष्ट्रीय रिज़र्व के रूप में मौजूद रहती है। यह देश के चालू खाता घाटे, निर्यात-आयात संतुलन, मुद्रा स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक पहलुओं को संभालने में मदद करती है। अगर भंडार मजबूत है, तो आर्थिक संकट के समय देश अधिक मजबूती से खड़ा रह सकता है।
भंडार में अचानक बढ़त कैसे आई?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक अंतिम सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति (Foreign Currency Assets) और सोने में हुई बढ़त रही है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में लगभग 9.65 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है, जिसका असर कुल आंकड़ों पर साफ़ दिखता है। वहीं सोने के भंडार में भी 4.62 अरब डॉलर की बढ़त दर्ज की गई है, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब है। इन दोनों घटकों ने मिलकर भंडार में यह बड़ा उछाल दिलाया।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर, यूरो, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रमुख मुद्राएं शामिल होती हैं। इन मुद्राओं का मूल्य डॉलर के मुकाबले तय होता है और उनका समग्र मूल्य देश के फॉरेक्स रिज़र्व का एक बड़ा हिस्सा बनता है। इन विभिन्न करंसीज़ की मौजूदगी से RBI को मुद्रा बाज़ार में लचीलापन मिलता है।
सोने की भूमिका क्यों अहम है?
सोना विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह संकट के समय निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करता है। जब वैश्विक बाज़ार में अनिश्चितता होती है, तो सोने की मांग बढ़ती है और इसका मूल्य भी ऊँचा हो सकता है। भारत के सोने के भंडार में हुई वृद्धि भी भंडार की कुल बढ़त में योगदान कर रही है। सोना इसीलिए भी अहम है क्योंकि यह अत्यंत मजबूत और स्थिर संपत्ति के रूप में माना जाता है।
हालांकि भंडार के मुख्य घटकों में वृद्धि हुई है, कुछ हिस्सों में कमी भी देखी गई है। विशेष आहरण अधिकार (SDR) में थोड़ी गिरावट आई है और IMF में रखे आरक्षित निधि में भी कुछ कमी दर्ज की गई है। परंतु कुल मिलाकर इसका प्रभाव भंडार की बढ़त की दिशा को बदलने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
700 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है और इसे आर्थिक मजबूती की निशानी माना जा रहा है। वैश्विक बाज़ार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत ने अपने विदेशी धन भंडार को मजबूत आधार पर स्थापित कर लिया है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।