US Dollar vs INR: भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है और मंगलवार (16 दिसंबर 2025) की सुबह के कारोबार में 91.19 के नए निचले स्तर तक पहुंच गया। साल की शुरुआत से अब तक रुपया करीब 6% गिर चुका है। इस गिरावट का असर सीधे विदेशी निवेशकों (FIIs) की रिटर्न पर पड़ रहा है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से सोना, चांदी, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश करने वालों की आमदनी पर भी असर हुआ है।
FIIs के बिकवाली से शेयर बाजार में दबाव
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपया कमजोर होने के कारण विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिससे उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली शुरू कर दी है। यह बिकवाली इतनी तेज है कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी लंबे समय तक तेजी को बनाए नहीं रख पा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर निफ्टी 50 में हाल ही में 25,750 से 26,350 तक का उछाल आया, लेकिन FIIs की बिकवाली के चलते इस स्तर को टिकाए रखना मुश्किल हो गया। घरेलू निवेशक रुपया कमजोर होने पर कुछ हद तक खरीदारी करते हैं, लेकिन जब अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 98 के नीचे गिर गया, तो घरेलू खरीदारी और तेज हो गई। इसके कारण भारतीय सोना, चांदी, म्यूचुअल फंड और स्टॉक्स सहित कई निवेशों पर असर पड़ा है।
रुपया कमजोर होने का शेयर बाजार पर असर
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होने के कारण FIIs की धारणा प्रभावित हुई है। जुलाई 2025 से FIIs लगातार नेट सेलर रहे हैं। DIIs ने भरसक प्रयास किया है, लेकिन FIIs की बिकवाली रोकना मुश्किल हो गया है। इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशकों का पैसा भारतीय बाजार से बाहर जा रहा है और घरेलू निवेशक इसे रोक पाने में असमर्थ हैं।
सोना और चांदी के दामों में तेजी
रुपया कमजोर होने के चलते सोना और चांदी के दाम बढ़ रहे हैं। जब डॉलर इंडेक्स 98 के नीचे गिरा और भारतीय रुपया 91.19 तक कमजोर हुआ, तब सोने और चांदी की मांग में तेजी आई। कमजोर रुपया इन निवेशों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इसका मतलब है कि भारतीय निवेशकों के लिए यह समय सोना और चांदी खरीदने का अनुकूल समय हो सकता है।
म्यूचुअल फंड निवेशकों पर असर
म्यूचुअल फंड में निवेश हमेशा मार्केट रिस्क के अधीन रहता है। FIIs की बिकवाली के कारण म्यूचुअल फंड की रिटर्न पर असर पड़ा है, खासकर साल की शुरुआत से अब तक। लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह नुकसान ज्यादा मायने नहीं रखता। लंबे समय में निवेशकों को अधिक यूनिट्स मिलेंगी, जो भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती हैं। केवल शॉर्ट और मिड-टर्म निवेशकों को इस दौरान नुकसान हो सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अहमियत
रुपया कमजोर होने के पीछे मुख्य कारण टैरिफ से जुड़े मसले और विदेशी निवेशकों की बिकवाली हैं, आर्थिक बुनियादी ढांचे में गिरावट नहीं। जब तक ये अस्थायी असंतुलन बना रहेगा, रुपया दबाव में रहेगा। वर्तमान समय में 90.00-90.20 रुपया का मजबूत समर्थन क्षेत्र माना जा रहा है। भारत-अमेरिका के व्यापार समझौते का अंतिम रूप महत्वपूर्ण होगा। यह समझौता टैरिफ को कम कर सकता है और विदेशी निवेशकों में निश्चितता ला सकता है। साथ ही, अगले साल अर्थव्यवस्था में विकास गति बढ़ाने से कॉर्पोरेट कमाई में सुधार होगा और शेयर बाजार के मूल्यांकन की चिंता कम होगी।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको निवेश करना है तो एक्सपर्ट्स से संपर्क करें।)
