Indian Railway की लाइफलाइन माना जाने वाला 'पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम' (PRS) अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। पिछले लगभग चार दशकों से करोड़ों यात्रियों को टिकट मुहैया कराने वाला यह नेटवर्क अब पुराना पड़ चुका है और भारी लोड के समय अक्सर धीमा हो जाता है। रेलवे ने अब फैसला किया है कि इस 40 साल पुराने सिस्टम को पूरी तरह से 'ओवरहाल' (कायाकल्प) किया जाएगा। अगस्त 2026 से रेलवे इस पुराने नेटवर्क से नए और अपग्रेडेड रिजर्वेशन सिस्टम की ओर बढ़ना शुरू कर देगा। यह बदलाव न केवल टिकट बुकिंग की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि यात्रियों के पूरे सफर के अनुभव को आधुनिक बना देगा।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
वर्तमान रिजर्वेशन सिस्टम की नींव 1980 के दशक के मध्य में रखी गई थी। हालांकि समय-समय पर इसमें सुधार किए गए, लेकिन इसका मूल ढांचा आज की बढ़ती जनसंख्या और डिजिटल मांग के लिए पर्याप्त नहीं है। खासकर 'तत्काल' बुकिंग के समय या त्योहारों के दौरान जब लाखों लोग एक साथ वेबसाइट और काउंटरों पर होते हैं, तो सिस्टम क्रैश होने या धीमा होने की समस्या आम हो जाती है। नया अपग्रेडेड सिस्टम क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित होगा, जो एक साथ लाखों ट्रांजैक्शन को बिना किसी रुकावट के प्रोसेस करने में सक्षम होगा।
अगस्त से शुरू होगा ट्रांजिशन फेज
रेलवे इस बदलाव को चरणों में लागू करने की योजना बना रहा है। अगस्त 2026 से इसका 'ट्रांजिशन' यानी बदलाव का दौर शुरू होगा। इसका मतलब है कि पुराने डेटा को नए और सुरक्षित सर्वर पर शिफ्ट किया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस प्रक्रिया के दौरान यात्रियों को टिकट बुक करने में कोई असुविधा न हो। नए सिस्टम के आने के बाद यात्रियों को IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर पहले से कहीं अधिक तेज रिस्पॉन्स मिलेगा। टिकट सर्च करने से लेकर पेमेंट करने तक का समय काफी कम हो जाएगा।
वेटिंग लिस्ट और सीट उपलब्धता में सुधार
इस अपग्रेड का सबसे बड़ा फायदा वेटिंग लिस्ट के प्रबंधन में देखने को मिल सकता है। नए सिस्टम में ऐसे स्मार्ट एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया जाएगा जो बेहतर तरीके से सीटों की उपलब्धता का अनुमान लगा सकेंगे। इससे यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, 'अल्टरनेट ट्रेन एकोमोडेशन' (विकल्प योजना) को भी अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। डिजिटल पेमेंट के फेल होने की दर भी काफी कम हो जाएगी, जो वर्तमान में कई यात्रियों के लिए सिरदर्द का कारण बनती है।
पुराने सिस्टम में हैकिंग और अवैध सॉफ्टवेयर (Bots) के जरिए टिकट ब्लॉक करने की शिकायतें आती रहती थीं। नया नेटवर्क 'साइबर सुरक्षा' के लिहाज से काफी मजबूत होगा। इसमें मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन और उन्नत सुरक्षा प्रोटोकॉल होंगे, जिससे फर्जी तरीके से टिकट बुक करने वालों पर लगाम लगेगी। साथ ही, रिफंड की प्रक्रिया भी तेज होगी। अगर आप टिकट कैंसिल करते हैं, तो नए सिस्टम के जरिए पैसा आपके खाते में पहले के मुकाबले जल्दी वापस आने की संभावना है।
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