GDP Growth Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह वही दर है जो वर्ष 2024-25 में भी दर्ज की गई थी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती, स्थिरता और अवसर की तस्वीर पेश कर रही है।
RBI के अनुसार तिमाही दरों का पूर्वानुमान
- अप्रैल-जून 2025: 6.5%
- जुलाई-सितंबर 2025: 6.7%
- अक्टूबर-दिसंबर 2025: 6.6%
- जनवरी-मार्च 2026: 6.3%
यह अनुमान दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था हर तिमाही में मजबूत बनी रहेगी, हालांकि वर्ष के अंत में थोड़ी नरमी देखी जा सकती है।
रेपो रेट में 0.5% की कटौती
मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.5 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है। इस कटौती का उद्देश्य निवेश और उपभोग को प्रोत्साहित कर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को बढ़ाना है।
मूल्य स्थिरता और वृद्धि का संतुलन जरूरी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बीच, घरेलू वृद्धि को प्राथमिकता देना अब और भी आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि आज की मौद्रिक नीति इस दिशा में एक ठोस कदम है।
वैश्विक चुनौतियां, घरेलू स्थिरता
मल्होत्रा ने कहा कि पूंजी प्रवाह और विनिमय दरों की अस्थिरता उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती है। इसके बावजूद, भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत है, और नीति में स्पष्टता एवं स्थिरता बनी हुई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की तीन प्रमुख ताकतें
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारत की आर्थिक मजबूती का आधार तीन चीजों पर है:-
- मजबूत बही-खाते (बैलेंस शीट्स)
- मूल्य, वित्तीय और राजनीतिक स्थिरता
- जनसांख्यिकी, डिजिटलीकरण और घरेलू मांग का समर्थन
निजी खपत और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वृद्धि को तेज करने के लिए घरेलू निजी खपत और निवेश को नीतिगत उपायों से प्रेरित करना जरूरी है।
कृषि और ग्रामीण मांग को मिल सकती है ताकत
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने उम्मीद जताई कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से बेहतर रह सकता है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग में सुधार आएगा।
