अमेरिका और ईरान द्वारा लगातार दूसरे दिन भी फारस की खाड़ी में कोई सैन्य हमला न किए जाने के बाद कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इसका असर आज भारतीय रुपये और शेयर बाजार में देखने को मिल रहा है। शेयर बाजार में अच्छी तेजी है। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है। बता दें कि रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में 28 पैसे मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 96.25 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और अमेरिका तथा ईरान की ओर से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक रुख से रुपये को बल मिला।
डॉलर इंडेक्स भी कमजोर हुआ
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक भी ऊंचे स्तर से नीचे आया, जबकि घरेलू शेयर बाजार में मजबूत लिवाली का रुख देखने को मिला, जिससे स्थानीय मुद्रा को और मजबूती मिली। छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.04 पर आ गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.18 प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा गंवाने के बाद यह 96.28 प्रति डॉलर पर कारोबार करता देखा गया। इसके बावजूद यह पिछले बंद भाव की तुलना में 28 पैसे की बढ़त में रहा। रुपया शुक्रवार को निचले स्तर से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 4.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को शुद्ध आधार पर 3,892.77 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की।
कच्चे तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा था
ईरान संकट फिर उपजने से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और व्यापक युद्ध की आशंका के कारण तेल की कीमतों में इस महीने उछाल आया था। निवेशकों को चिंता थी कि अगर संघर्ष और बढ़ा, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रभावित हो सकती है। अमेरिका और इजराइल की ओर से फरवरी के अंत में ईरान पर किए गए हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। तेल उत्पादक देशों ने वैकल्पिक मार्ग तलाशने शुरू किए हैं, लेकिन उन पर भी दबाव बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह लाल सागर के रास्ते जा रहे सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर भी हमले हुए। जब बाजार में तेल की उपलब्धता कम होती है, तो उसकी कीमत बढ़ती है और साथ ही पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों के दाम भी बढ़ जाते हैं।
