रेयर अर्थ मेटल में भारत की बड़ी छलांग, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी ये अहम जानकारी
- Edited by: आलोक कुमार
- Updated Jan 28, 2026, 03:41 PM IST
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि चिप के अलावा एक और प्रमुख क्षेत्र है जिसके लिए मेरी सरकार ने ‘मिशन मोड’ में काम करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम की जा रही है।
रेयर अर्थ मेटल
दुनियाभर में रेयर अर्थ मेटल्स की जबरदस्त मांग है। भारत भी अपनी जरूरत के लिए चीन, जापान समेत दूसरे देशों पर निर्भर है। समय—समय पर चीन की दादागिरी से दिक्कत हो रही है। बता दें कि रेयल अर्थ मेटल का इस्तेमाल मोबाइल फोन निर्माण से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों में होता है। अब भारत ने इस परेशानी से पार पाने का रास्ता ढूंढ लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर के अलावा रेयर अर्थ मेटल्स के क्षेत्र में ‘मिशन मोड’ पर काम कर रही है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का मकसद इन खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता को कम करना है। सरकार ने पिछले साल देश के भीतर एवं अपतटीय स्थानों पर रेयर अर्थ मेटल्स की खोज को बढ़ावा देने के लिए 16,300 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी थी।
मिशन मोड में काम कर रही सरकार
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि चिप के अलावा एक और प्रमुख क्षेत्र है जिसके लिए मेरी सरकार ने ‘मिशन मोड’ में काम करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम की जा रही है। राष्ट्रपति की टिप्पणियां लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए देश के रणनीतिक प्रयासों को रेखांकित करती हैं जो इलेक्ट्रिक वाहनों, हरित ऊर्जा, रक्षा एवं उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। एनसीएमएम का उद्देश्य भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों को विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज संपदाओं का अधिग्रहण करने और संसाधन संपन्न देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह देश के भीतर महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार विकसित करने का भी प्रस्ताव करता है।
महत्वपूर्ण खनिज किसी देश की आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं और इनकी अनुपलब्धता या कुछ ही भौगोलिक स्थानों में इनका संकेंद्रण आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियों का कारण बन सकता है।
भारत-ईयू डील रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए बुधवार को कहा कि इससे विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों को गति मिलेगी और देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। मुर्मू ने कहा कि पिछले 11 वर्ष में देश की आर्थिक नींव काफी मजबूत हुई है और भारत विभिन्न वैश्विक संकटों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। बजट सत्र के पहले दिन संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता संपन्न होने पर, मैं सभी नागरिकों को बधाई देती हूं। इससे भारत के विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों को गति मिलेगी और भारत के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए जिसे ‘सबसे बड़ा समझौता’ कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य दो अरब लोगों का बाजार तैयार करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की रक्षा के लिए व्यापार एवं रक्षा का बड़े पैमाने पर लाभ उठाने हेतु एक परिवर्तनकारी पांच वर्षीय एजेंडा भी पेश किया है।
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