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टैक्स चुकाने के मामले में एशिया में सबसे आगे भारतीय, रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा

Tax System: दुनिया में टैक्स सिस्टम पर जनता का भरोसा सबसे अधिक एशिया में है, जिसमें भारत सबसे आगे है। यहां लोग टैक्स चुकाने को केवल नियम नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं और सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा रखते हैं। यह बात एसीसीए, आईएफएसी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड और ओईसीडी की संयुक्त रिपोर्ट में सामने आई।

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जनता का भरोसा, नैतिकता और विकास: भारत में टैक्स संस्कृति का नया रिकॉर्ड (तस्वीर-istock)

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Tax System: एशिया में कर (टैक्स) प्रणाली पर जनता का भरोसा सबसे अधिक है और इस मामले में भारत खास तौर पर आगे है। भारत में लोग टैक्स चुकाने को केवल कानूनी जरुरत नहीं, बल्कि अपनी नागरिक जिम्मेदारी मानते हैं। सोमवार को एसीसीए (ACCA), आईएफएसी (IFAC), चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड (CA ANZ) और ओईसीडी (OECD) की नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार भारत में टैक्स भुगतान को लेकर लोगों में नैतिक भावना और सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत है।

जनता का नजरिया: टैक्स बोझ नहीं, योगदान है

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में करीब 45 प्रतिशत लोग मानते हैं कि सरकार द्वारा जमा किए गए टैक्स का इस्तेमाल जनहित के कामों में होता है। वहीं 41 प्रतिशत लोगों का कहना है कि टैक्स देना उनके लिए कोई बोझ नहीं है, बल्कि यह समाज और देश के लिए योगदान है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत में टैक्स को नागरिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है, न कि केवल खर्च के तौर पर।

टैक्स चोरी को नकारने का रवैया

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में 68 प्रतिशत लोग किसी भी हालत में टैक्स चोरी को सही नहीं ठहराएंगे, चाहे उन्हें ऐसा करने का मौका ही क्यों न मिले। यह आंकड़ा भारत में लोगों की उच्च नैतिकता और ईमानदारी को दर्शाता है। जनता का यह रवैया बताता है कि लोग टैक्स सिस्टम को केवल नियमों तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे समाज और देश की भलाई से जोड़कर देखते हैं।

समाज और पर्यावरण के लिए टैक्स देने की इच्छा

सर्वे से यह भी पता चला कि भारतीय लोग समाज और पर्यावरण के लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए टैक्स देने को तैयार हैं। करीब 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए थोड़ा या ज्यादा अतिरिक्त टैक्स देने के लिए तैयार हैं। इसका मतलब है कि भारत में लोग टैक्स नीति को केवल सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे देश और समाज के भविष्य से जोड़कर देखते हैं।

एशिया में टैक्स प्रणाली पर भरोसा

आईएएनएस के मुताबिक एसीसीए के भारत निदेशक मोहम्मद साजिद खान ने कहा कि भारत के नतीजे पूरे एशिया के रुझान को दिखाते हैं। एशिया में लोग टैक्स व्यवस्था को न्यायपूर्ण, पारदर्शी और जनकल्याण से जुड़ा मानते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोगों की अतिरिक्त टैक्स देने की इच्छा यह दिखाती है कि कर नीति और समाज के लक्ष्य एक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में शामिल 29 देशों के सर्वे से पता चला कि एशिया के लोग अपने टैक्स सिस्टम को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक निष्पक्ष और उपयोगी मानते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में करीब 65 प्रतिशत लोग टैक्स को खर्च के बजाय समाज के लिए योगदान मानते हैं।

पारदर्शिता और ईमानदारी

आईएएनएस के मुताबिक एसीसीए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेलेन ब्रांड ओबीई ने कहा कि एशिया में टैक्स व्यवस्था पर जनता का भरोसा पूरी दुनिया के लिए उदाहरण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस भरोसे को बनाए रखने के लिए सरकारों को लगातार ईमानदारी और पारदर्शिता दिखानी होगी। ओईसीडी के टैक्स नीति और प्रशासन केंद्र की निदेशक मनल कोर्विन ने कहा कि यह अध्ययन एशिया में टैक्स नैतिकता पर शुरू किए गए नए शोध का पहला चरण है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सरकारों के साथ मिलकर इन नतीजों पर चर्चा की जाएगी ताकि पूरे एशिया में टैक्स सिस्टम में विश्वास बढ़ाने के तरीके ढूंढे जा सकें। इससे सरकारें अधिक निष्पक्ष, उत्तरदायी और सुसंगत टैक्स प्रणाली तैयार कर सकेंगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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