भारत सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए इनकम टैक्स कानून में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से मंजूरी के बाद शुक्रवार 5 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 को मंजूरी दे दी है।
इनकम टैक्स संसोधन अध्यादेश, 2026 के तहत सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors-FII) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities-GSec) से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर आयकर से छूट दी गई है।
यह अध्यादेश 5 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ है। सरकार का मानना है कि इस कदम से भारतीय डेट मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ेगा और सरकारी बॉन्ड की मांग को मजबूती मिलेगी।

आयकर कानून संसोधन अध्यादेश
1 अप्रैल 2026 से लागू
अध्यादेश में स्पष्ट किया गया है कि इसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा। यानी चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से ही यह कर छूट लागू होगी। इसका मतलब है कि योग्य विदेशी निवेशकों को इस अवधि के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों से हुई आय पर कर राहत का लाभ मिल सकेगा।
क्या है नया प्रावधान?
अध्यादेश के जरिए आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची-IV में दो नई प्रविष्टियां जोड़ी गई हैं। इनके तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों और Bank for International Settlements को सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाले ब्याज और उनके हस्तांतरण, बिक्री या एक्सचेंज से होने वाले कैपिटल गेन को आयकर से छूट दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह छूट निर्धारित प्रारूप और प्रक्रिया के तहत आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की शर्त पर मिलेगी।
BIS को भी मिला फायदा
अध्यादेश में केवल विदेशी संस्थागत निवेशकों को ही नहीं, बल्कि Bank for International Settlements (BIS) को भी समान कर छूट दी गई है। BIS दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान माना जाता है और इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के बेसल में स्थित है।
BIS को दी गई यह छूट भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार को वैश्विक संस्थागत निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में अहम कदम है।
सरकारी बॉन्ड बाजार पर क्या होगा असर?
हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कई सुधार किए हैं। अब कर छूट मिलने से विदेशी निवेशकों का वास्तविक रिटर्न बढ़ेगा, जिससे भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का आकर्षण और बढ़ सकता है। इससे सरकारी उधारी लागत कम रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ने और विदेशी निवेश प्रवाह मजबूत होने की संभावना है।
परिभाषाएं भी हुईं तय
अध्यादेश में कहा गया है कि "Foreign Institutional Investor" की परिभाषा आयकर अधिनियम की धारा 210(6)(a) के अनुसार होगी, जबकि "Government Security" का अर्थ Government Securities Act, 2006 में दी गई परिभाषा के अनुरूप होगा।
संसद सत्र से पहले अध्यादेश क्यों?
चूंकि संसद सत्र में नहीं थी, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति ने अध्यादेश जारी किया। सरकार ने माना कि तत्काल कार्रवाई जरूरी है और इसी वजह से इस कर राहत को अध्यादेश के माध्यम से लागू किया गया।
क्या है इसका बड़ा संदेश?
यह कदम ऐसे समय आया है जब सरकार भारतीय डेट मार्केट को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना चाहती है। ब्याज आय और कैपिटल गेन दोनों पर कर छूट देकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बॉन्ड बाजार को गहरा बनाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
