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India-EU FTA : अमेरिका से बिल्कुल अलग है यह डील, पीएम मोदी ने गिनाए किसानों से लेकर उद्योग जगत के फायदे ​

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता सिर्फ टैरिफ घटाने की डील नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक ट्रेड रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस India-EU FTA को किसानों और घरेलू उद्योग के लिए फायदेमंद बता रहे हैं, वह अमेरिका के साथ भारत के ट्रेड रिश्तों से कई मायनों में अलग नजर आता है।

India EU Deal Who gets what

भारत और यूरोपीय संघ में समझौता (इमेज क्रेडिट, PIB)

India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे भारत के किसानों, MSME और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए फायदेमंद बताया है। इस समझौते को जब अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते के साथ रखकर देखा जाता है, तो यह पूरी तरह अलग नजर आता है। असल में अमेरिका जहां इस तरह के समझौते के तहत भारत पर जबरन अपना कृषि बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने पर जोर दे रहा है। वहीं, इस समझौते में दोनों ही क्षेत्रों के किसानों के हितों को सुरक्षित रखा गया है।

अमेरिका से कैसे अलग?

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अब तक कोई व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है। अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिकतर टैरिफ विवाद, सब्सिडी, वीजा नियमों और नियामकीय दबावों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। वॉशिंगटन अक्सर कृषि, डेयरी और ई-कॉमर्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाजार खोलने का दबाव बनाता रहा है। इसके उलट, EU के साथ हुई डील में भारत ने अपनी “रेड लाइंस” साफ रखीं। कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर को FTA से बाहर रखा गया है। यानी यूरोप से सस्ता दूध, चीज या एग्रीकल्चर प्रोड्यूस भारत के किसानों के लिए खतरा नहीं बनेगा। यही वजह है कि सरकार इसे अमेरिका-स्टाइल ट्रेड मॉडल से अलग और ज्यादा संतुलित मान रही है।

किसानों को क्या फायदा?

प्रधानमंत्री मोदी बार-बार कह रहे हैं कि यह समझौता किसानों के हितों से समझौता किए बिना किया गया है। EU के साथ FTA में भारत ने उन कृषि उत्पादों पर फोकस किया है, जहां भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। कॉफी, चाय, मसाले, प्रोसेस्ड फूड, बासमती चावल और कुछ ऑर्गेनिक एग्री प्रोडक्ट्स को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। ये ऐसे सेगमेंट हैं, जहां EU घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं करता और आयात पर निर्भर रहता है। इससे भारतीय किसानों और एग्री-एक्सपोर्टर्स को स्थिर और प्रीमियम बाजार मिल सकता है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा Free Trade Agreement संपन्न किया है। आज 27 तारीख है और ये सुखद संयोग है कि आज ही के दिन, यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ भारत ये FTA कर रहा है।। यह ऐतिहासिक समझौता- हमारे किसानों, हमारे छोटे उद्योगों की यूरोपियन मार्केट तक पहुंच आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा, और हमारे सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और प्रबल करेगा। इतना ही नहीं, यह FTA, भारत और European Union के बीच इनवेस्टमेंट को बूस्ट करेगा, नई इनोवेशन साझेदारी बनाएगा। और वैश्विक स्तर पर सप्लाइ चेन को मजबूत करेगा। यानी यह सिर्फ ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है। यह साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है।

भारत ने यूरोप के किन प्रोडक्ट पर घटाया टैरिफ

प्रोडक्टमौजूदा टैरिफFTA के बाद टैरिफ
वाइन150%प्रीमियम रेंज 20%, मीडियम रेंज 30%
स्पिरिट्स (शराब)150% तक40%
बीयर110%50%
ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और अन्य वेजिटेबल ऑयल45% तक0%
कीवी और नाशपाती33%कोटा के भीतर 10%
फ्रूट जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर55% तक0%
प्रोसेस्ड फूड (ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्किट, पास्ता, चॉकलेट, पेट फूड)50% तक0%
शीप मीट33%0%
सॉसेज और अन्य मीट प्रिपरेशन110% तक50%

यूरोप के किन सेक्टर से आयात होगा सस्ता?

प्रोडक्ट2024 में EU का भारत को निर्यात (EUR)मौजूदा टैरिफFTA के बाद टैरिफ
मशीनरी और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट€16.3 अरब44% तकलगभग सभी प्रोडक्ट्स पर 0%
एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट€6.4 अरब11% तकलगभग सभी प्रोडक्ट्स पर 0%
ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल इक्विपमेंट€3.4 अरब27.5% तक90% प्रोडक्ट्स पर 0%
प्लास्टिक्स€2.2 अरब16.5% तकलगभग सभी प्रोडक्ट्स पर 0%
पर्ल्स, कीमती पत्थर और धातुएं€2.1 अरब22.5% तक20% प्रोडक्ट्स पर 0%, 36% पर टैरिफ में कटौती
केमिकल्स€3.2 अरब22% तकलगभग सभी प्रोडक्ट्स पर 0%
मोटर व्हीकल्स€1.6 अरब110%10% (2.5 लाख यूनिट के कोटा के भीतर)
आयरन और स्टील€1.5 अरब22% तकलगभग सभी प्रोडक्ट्स पर 0%
फार्मास्यूटिकल्स€1.1 अरब11%लगभग सभी प्रोडक्ट्स पर 0%

कौनसे सेक्टर बाहर?

EU की बड़ी मांगों में से एक डेयरी और फूड प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कटौती थी, लेकिन भारत ने इसे साफ तौर पर खारिज किया। सरकार का तर्क है कि भारत में डेयरी सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका का आधार है। अमेरिका और कुछ अन्य देशों के साथ संभावित ट्रेड डील्स में यही सबसे बड़ा विवाद बिंदु रहा है। EU FTA में इन सेक्टरों को बाहर रखकर भारत ने यह संदेश दिया है कि मुक्त व्यापार का मतलब घरेलू हितों की अनदेखी नहीं है।

कैसे बनाया संतुलन?

भारत-EU FTA की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें इंडस्ट्रियल गुड्स और एग्रीकल्चर के बीच स्पष्ट संतुलन बनाया गया है। जहां एक तरफ यूरोप से मशीनरी, टेक्नोलॉजी और हाई-एंड इंडस्ट्रियल इनपुट्स सस्ते होंगे, वहीं दूसरी तरफ भारतीय एक्सपोर्ट्स को टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स से राहत मिलेगी। इसका अप्रत्यक्ष फायदा किसानों को भी मिलेगा, क्योंकि सस्ती मशीनरी, फर्टिलाइजर-इनपुट्स और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी से एग्री वैल्यू-चेन मजबूत होगी। सरकार का दावा है कि इससे “फार्म से फैक्ट्री और फैक्ट्री से फॉरेन मार्केट” तक की कड़ी और मजबूत होगी।

अमेरिका बनाम यूरोप

अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते रणनीतिक और भू-राजनीतिक जरूर हैं, लेकिन ट्रेड के स्तर पर वे अक्सर टकराव वाले रहे हैं। EU के साथ समझौता अपेक्षाकृत स्थिर, नियम-आधारित और दीर्घकालिक नजरिये से तैयार किया गया है। EU भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई-चेन पार्टनर के तौर पर देखता है, जबकि अमेरिका कई बार भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार मानकर चलता है। यही अंतर भारत-EU FTA को अमेरिका से अलग बनाता है।

क्यों अहम है ये डील?

सरकार के मुताबिक यह समझौता भारत को ग्लोबल ट्रेड में ज्यादा भरोसेमंद और प्रेडिक्टेबल पार्टनर के रूप में स्थापित करेगा। किसानों के लिए इसका मतलब है बिना सस्ती विदेशी फसल की मार झेले, नए निर्यात अवसर। इंडस्ट्री के लिए मतलब है कम लागत, ज्यादा निवेश और बेहतर टेक्नोलॉजी एक्सेस। इसी संतुलन की वजह से पीएम मोदी इसे सिर्फ एक ट्रेड एग्रीमेंट नहीं, बल्कि “किसानों और भारत के भविष्य की सुरक्षा” से जोड़कर देख रहे हैं।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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