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भारत बना ग्लोबल GCC हब: यहां दुनिया भर के ऐसे 55 प्रतिशत से अधिक सेंटर

Global Capability Centers: भारत वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां दुनिया के 55% से अधिक GCC स्थित हैं। हालांकि, ये इनोवेशन केंद्र 500 से अधिक कानूनी दायित्वों और हर साल 2,000 से अधिक अनिवार्य फाइलिंग सहित केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर की जटिल नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरते हैं, जो इनके संचालन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।

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भारत, जीसीसी का वैश्विक केंद्र बनकर उभरा (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Global Capability Centers: भारत ने वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए खुद को दुनिया का प्रमुख केंद्र बना लिया है। आज दुनिया के 55 प्रतिशत से अधिक GCC भारत में स्थित हैं। ये केंद्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों के स्वामित्व वाले होते हैं और शुरुआत में केवल बैक-ऑफिस और आईटी समर्थन के लिए लागत बचाने के उद्देश्य से स्थापित किए गए थे। लेकिन समय के साथ, ये रणनीतिक केंद्र बन गए हैं, जो उत्पाद अभियांत्रिकी, डिजिटल रूपांतरण, कृत्रिम मेधा (AI) अनुसंधान और वैश्विक अनुपालन प्रबंधन जैसे उच्च-मूल्य कार्यों को संभालते हैं।

जटिल अनुपालन का ढांचा

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक भारत में GCC का संचालन बेहद जटिल नियामकीय ढांचे के तहत होता है। टीमलीज रेगटेक के अध्ययन के अनुसार, GCC को केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर 500 से अधिक अलग-अलग कानूनी दायित्वों और 2,000 से अधिक वार्षिक फाइलिंग्स को पूरा करना पड़ता है। एक सामान्य केंद्र के लिए ये दायित्व सात मुख्य श्रेणियों में बंटे होते हैं और केंद्र के आकार, प्रकृति और संचालन के हिसाब से इनका पालन करना आवश्यक होता है।

उदाहरण के लिए, कर्नाटक के विशेष आर्थिक क्षेत्र में पंजीकृत और 1,000 कर्मचारियों वाली एक GCC को 537 अलग-अलग दायित्वों का पालन करना पड़ता है। यदि इन दायित्वों की वार्षिक आवृत्ति को देखा जाए तो यह संख्या बढ़कर 2,051 हो जाती है। इसके अलावा, कर्मचारियों की संख्या बढ़ने या कारोबार के विस्तार के कारण घटना-आधारित अतिरिक्त अनुपालन आवश्यकताएँ भी उत्पन्न होती हैं।

मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक दस्तावेज

एक औसत GCC को संचालन बनाए रखने के लिए हर महीने 81, हर तिमाही 185 और हर वर्ष 194 प्रकार के दस्तावेज दाखिल करने पड़ते हैं। ये अनुपालन श्रम, कर, पर्यावरण और अन्य कानूनों से जुड़े होते हैं, जिसमें केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर के कुल 18 नियामक निकाय शामिल हैं।

उच्च मूल्य वाले कार्य और उभरती मांग

भारत के GCC अब केवल बैक-ऑफिस तक सीमित नहीं हैं। ये केंद्र प्रौद्योगिकी सेवाओं, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, जीवन विज्ञान और अभियांत्रिकी जैसे क्षेत्रों में उच्च-मूल्य कार्य करते हैं। उन्नत डिजिटल क्षमताओं की बढ़ती मांग के कारण AI, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग से जुड़े पदों पर हर साल 18 से 22 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि हो रही है।

गैर-अनुपालन के जोखिम

अध्ययन में यह भी बताया गया कि गैर-अनुपालन के गंभीर जोखिम हैं। सबसे अधिक दंड श्रम और रोजगार कानूनों के तहत आते हैं, जिनसे जुड़े 151 दायित्व हैं। इनमें से 90 प्रावधानों में कारावास का प्रावधान है, और 60 सीधे श्रम कानूनों से जुड़े हैं। इसके बाद राजस्व कानून और कॉरपोरेट प्रशासन से जुड़े नियम आते हैं। भौगोलिक स्थिति भी अनुपालन परिणामों को प्रभावित करती है।

कर्नाटक का नया नियम

कर्नाटक राज्य ने 2025-26 के बजट में ‘नियोक्ता अनुपालन अपराधमुक्ति विधेयक’ पेश किया है। इसका उद्देश्य कुछ अनुपालन उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड को खत्म कर आर्थिक जुर्माना या दीवानी कार्रवाई का विकल्प देना है। इससे व्यवसायों पर परिचालन संबंधी बोझ कम होगा।

डिजिटल और स्वचालित अनुपालन की आवश्यकता

टीमलीज रेगटेक के सह-संस्थापक एवं CEO ऋषि अग्रवाल के अनुसार, भारत के GCC जैसे-जैसे AI और साइबर सुरक्षा के लिए तेजी से विकसित हो रहे हैं, वे अब मैन्युअल और प्रतिक्रियात्मक प्रक्रियाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह पुराने तरीके अक्सर अनजाने में गैर-अनुपालन की स्थिति पैदा कर देते हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते नियामकीय परिदृश्य में वास्तविक अनुपालन क्षमता हासिल करना “रणनीतिक आवश्यकता” बन गया है ताकि कंपनियाँ कानूनी समझौतों से समझौता किए बिना नवाचार और विस्तार कर सकें।

भारत के GCC न केवल वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं बल्कि ये देश के निर्यात और आर्थिक विकास में भी अहम योगदान देते हैं। हालांकि, इनकी सफलता के लिए जटिल नियामकीय अनुपालन का कुशल प्रबंधन आवश्यक है। डिजिटल और स्वचालित अनुपालन प्रक्रियाओं के माध्यम से ही ये केंद्र तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बने रह सकते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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