India Export at Record High : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिकी टैरिफ के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन में लगातार बनी चुनौतियों के बावजूद भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर ने जुलाई में शानदार प्रदर्शन किया है। जुलाई 2026 में भारत का गुड्स एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 19.63% बढ़कर रिकॉर्ड $44.24 अरब पहुंच गया। इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग ने एक्सपोर्ट को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि, एक्सपोर्ट में इस तेज बढ़ोतरी के साथ एक चिंता भी सामने आई है। जुलाई में भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर $31.98 अरब हो गया, जो पिछले साल इसी महीने में $27.88 अरब था। जून 2026 में ट्रेड डेफिसिट $30.43 अरब रहा था।
9 महीने के हाई पर पहुंचा इंपोर्ट
जुलाई में भारत का इंपोर्ट बढ़कर $76.22 अरब हो गया। यह पिछले 9 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। फर्टिलाइजर, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और कोयले की ज्यादा खरीद ने इंपोर्ट बिल बढ़ाया। यानी भारत ज्यादा सामान विदेशों में बेच रहा है, लेकिन दूसरी तरफ देश की इंपोर्ट जरूरतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। यही वजह है कि रिकॉर्ड एक्सपोर्ट के बावजूद ट्रेड डेफिसिट बढ़ गया।
चांदी की खरीद में बड़ी गिरावट
कीमती धातुओं के इंपोर्ट में भी अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। जुलाई में सोने का इंपोर्ट 4.77% बढ़कर $4.16 अरब रहा। वहीं चांदी का इंपोर्ट 66.1% गिरकर महज $171.68 मिलियन रह गया। सरकार ने मई में सोने और चांदी समेत कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसके बाद चांदी की इंपोर्ट डिमांड में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
अमेरिका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट बाजार
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ लगाए जाने के बाद भी जुलाई में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन रहा, जबकि चीन सबसे बड़ा इंपोर्ट सोर्स बना। पश्चिम एशिया में संकट के बावजूद इस क्षेत्र में भारत का एक्सपोर्ट पिछले साल जुलाई की तुलना में करीब 8.62% बढ़ा। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी डेटा के मुताबिक अलग-अलग पोर्ट और शिपिंग लाइनों के जरिए कारोबार को जारी रखने से भारत को सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिली।
चार महीने में $173.78 अरब का एक्सपोर्ट
वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई दौरान भारत का गुड्स एक्सपोर्ट 17.04% बढ़कर $173.78 अरब हो गया। इस बढ़ोतरी में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बड़ी भूमिका रही, हालांकि इसमें कीमतों का असर भी शामिल है। एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी बताती है कि वैश्विक संकट और महंगी लॉजिस्टिक्स के बावजूद भारतीय कंपनियां नए बाजारों और सप्लाई रूट का इस्तेमाल कर अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। लेकिन बढ़ता इंपोर्ट और ट्रेड डेफिसिट आने वाले महीनों में सरकार और बाजार के लिए अहम निगरानी वाला मुद्दा बना रहेगा।
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