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US Tariffs: ट्रंप के 50% टैरिफ से निपटने का क्या है प्लान? एक्सपोटर्स को सरकार दे सकती है राहत; आगे की ये है योजना

India-US Tariffs: भारत सरकार हाई अमेरिकी टैरिफ से निपटने की तैयारी में है। वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुश्किल समय में निर्यातकों के साथ खड़ी है और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए हरसंभव रास्ता तलाशेगी। वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 131.8 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर का था।

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अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी (फोटो-ट्विटर)

अमेरिका में भारतीय वस्तुओं के आयात पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाए जाने से परेशान निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार कई उपायों पर काम कर रही है। इनमें निर्यात संवर्धन मिशन की शुरुआत, ऋण लौटाने को लेकर मोहलत और नकदी से जुड़ी मदद शामिल हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका का भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया ऊंचा शुल्क देश के लिए एक चेतावनी होने के साथ निर्यात में विविधता लाने का एक अवसर भी है।

इस संदर्भ में निर्यातकों की तरफ से की गई अपीलों पर उन्होंने कहा कि सरकार निर्यातकों की समस्याओं से पूरी तरह अवगत है और उन्हें राहत देने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लगाना शुरू कर दिया है। इसमें रूस से तेल खरीद जारी रखने के जुर्माने के तौर पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।

इस क्षेत्र में टैरिफ का गहरा असर

यह फैसला भारत पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इससे मशीनरी, झींगा, वस्त्र, चमड़ा-फुटवियर और रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के निर्यात पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। सरकार अब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से जुड़े निर्यातकों के लिए आपातकालीन ऋण गारंटी योजना, ऋण पर एक साल तक की मोहलत और निर्यात भुगतान की समय-सीमा बढ़ाने जैसे कदम उठाने पर विचार कर रही है, ताकि नकदी प्रवाह की समस्या को हल किया जा सके।

इसके साथ ही सरकार ई-कॉमर्स निर्यात हब योजना को भी तेजी से लागू करने की दिशा में प्रयास कर रही है। बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन को 2025 से 2031 तक छह वर्षों के लिए लागू करने की योजना है जिसके तहत करीब 25,000 करोड़ रुपये के समर्थन उपाय प्रस्तावित हैं। यह दो उप-योजनाओं 'निर्यात प्रोत्साहन' (10,000 करोड़ रुपये से अधिक) और 'निर्यात दिशा' (14,500 करोड़ रुपये से अधिक) के तहत लागू की जाएगी।

न्यूज एजेंसी भाषा के हवाले से निर्यातकों का कहना है कि इतने ऊंचे शुल्क पर अमेरिका को निर्यात कर पाना बहुत मुश्किल हो गया है। इसके अलावा पूरी तरह अमेरिकी बाजार पर ही निर्भर निर्यातकों के समक्ष गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। इन समस्याओं को लेकर निर्यातकों के निकाय फियो के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और अमेरिकी शुल्क वृद्धि से पैदा हुई चुनौतियों से उन्हें अवगत कराया।

द्विपक्षीय व्यापार में कौन आगे?

फियो के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल को वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुश्किल समय में निर्यातकों के साथ खड़ी है और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए हरसंभव रास्ता तलाशेगी। वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 131.8 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर का था।

मौजूदा वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में भारत का अमेरिका को निर्यात 21.64 प्रतिशत बढ़कर 33.53 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। हालांकि इनमें से करीब आधा हिस्सा ही 50 प्रतिशत शुल्क के दायरे में आता है। सरकार का मानना है कि यह स्थिति अस्थायी है और दीर्घकालिक रणनीतियों के माध्यम से भारतीय उद्योग को आत्मनिर्भर एवं प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। वाणिज्य मंत्रालय अब निर्यात में विविधता लाने और नए बाजारों की तलाश पर भी निर्यातकों के साथ व्यापक चर्चा कर रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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