Income Tax Return 2024: इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का मौसम चल रहा है। अब सिर्फ एक महीना बचा है। आखिर तारीख 31 जुलाई 2024 है। इनकम टैक्स एक्ट के मुताबक प्रत्येक व्यक्ति और संस्था को अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना जरूरी है, अगर उनकी आय एक निश्चित सीमा से अधिक है। अगर कोई व्यक्ति पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर रहा है, तो यह एक कठिन काम हो सकता है। पहली बार टैक्सपेयर्स को बुनियादी टैक्स कानूनों, कटौती और छूट के बारे में पता होना चाहिए। आइए जानते हैं कि नए टैक्सपेयर्स को क्या-क्या जानना जरूरी है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था
गौर हो कि दो प्रकार की टैक्स व्यवस्थाएं हैं- पुरानी टैक्स व्यवस्था और नई टैक्स व्यवस्था। दोनों के लिए टैक्स स्लैब दरें अलग-अलग हैं। पुरानी टैक्स व्यवस्था पुरानी टैक्स व्यवस्था, जो वर्षों से लागू है, व्यक्तियों को कई टैक्स छूट और कटौती प्रदान करती है। अक्सर क्लेम की जाने वाली कुछ छूटों और कटौतियों में हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA), सेक्शन 80C, 80D, 80CCD(1b), 80CCD(2) और अन्य के तहत कटौती शामिल हैं।
नई टैक्स व्यवस्था
मोदी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 1 अप्रैल 2020 से मौजूदा टैक्स व्यवस्था के वैकल्पिक विकल्प के रूप में एक नई टैक्स व्यवस्था शुरू की। 2023 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि नई टैक्स व्यवस्था अब डिफॉल्ट व्यवस्था के रूप में काम करेगी। नई टैक्स व्यवस्था में संशोधित टैक्स स्लैब और रियायती टैक्स दरें शामिल हैं और यह व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और व्यक्तियों के संघ (AOP) समेत सभी कैटैकरी के टैक्सपेयर्स पर समान रूप से लागू होती है। मौजूदा नियमों के मुताबिक अगर टेक्सपेयर अपने नियोक्ता के साथ अपनी प्राथमिकता घोषित करने में विफल रहते हैं तो नई टैक्स व्यवस्था के अंतर्गत आएंगे। यह ध्यान रखना जरूरी है कि नई टैक्स सिस्टम सीमाओं के साथ आती है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA), सेक्शन 80C, 80D, आदि जैसी कटौतियों के लिए छूट के क्लेम इस व्यवस्था के तहत लागू नहीं होंगे क्योंकि ये लाभ पुरानी टैक्स व्यवस्था के लिए डिजाइन किए गए थे।
फॉर्म 16
वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए ITR दाखिल करने का पहला कदम नियोक्ताओं से अपना फॉर्म 16 प्राप्त करना है। यह दस्तावेज महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों को प्रदान किया जाने वाला एक जरूरी TDS सर्टिफिकेट है। कंपनियां हर महीने कर्मचारियों के वेतन से TDS (स्रोत पर कर कटौती) काटती हैं और इसे सरकार को जमा करती हैं। यह प्रक्रिया तब होती है जब वेतन कर्मचारियों के खातों में आता जाता है। फॉर्म 16 एक व्यापक दस्तावेज है जिसमें इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए सभी जरुरी जानकारी शामिल है। नियोक्ता प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में अपने कर्मचारियों को यह फॉर्म प्रदान करने के लिए बाध्य हैं। आम तौर पर नियोक्ता यानी कंपनी (जिसमें आप काम करते हैं) के कर्मचारियों को मई के अंत तक या हर साल जून के मध्य से पहले फॉर्म 16 जारी करते हैं। फॉर्म 16 के दो भाग होते हैं। फॉर्म 16A नियोक्ता द्वारा किए गए कर्मचारी के टैक्स कटौती का समरी देता है और इसे इनकम टैक्स विभाग को भेजा जाता है। यह कर्मचारी की टैक्स स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है लेकिन इसे फॉर्म 16 के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। फॉर्म 16 और फॉर्म 16A दोनों अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं।
कुल टैक्स योग्य इनकम
पहली बार टैक्स रिटन दाखिल करने वालों को पता होना चाहिए कि मानक कटौती लागू है। अपनी टैक्स योग्य आय तक पहुंचने के लिए टैक्स कटौती और छूट को सकल आय से घटाया जाना चाहिए। टैक्स कटौती से तात्पर्य उन खर्चों से है जिन्हें आप अपनी कुल आय से घटा सकते हैं, इस प्रकार टैक्स के अधीन आय की राशि कम हो जाती है। कुछ सामान्य कटौतियों में हेल्थ इंश्योरेंस, होम लोन, एजुकेशन लोन और धर्मार्थ संगठनों को दान से संबंधित व्यय शामिल हैं। टैक्स छूट खास राशियां हैं जिन्हें आपकी कुल आय से बाहर रखा जा सकता है, जिससे अंततः आपकी टैक्स योग्य आय कम हो जाती है। भारत में कुछ भत्ते जैसे कि घर का किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता और छुट्टी यात्रा भत्ता (LTA) टैक्स छूट के उदाहरण हैं और एक विशिष्ट सीमा तक टैक्स के अधीन नहीं हैं।
फॉर्म 26AS
फॉर्म 26AS आपके सालाना टैक्स डिटेल के रूप में कार्य करता है, जिसमें टैक्स कटौती या क्लैक्शन डिटेल और आय स्रोत जैसे महत्वपूर्ण डिटेल शामिल होते हैं। यह दस्तावेज वेतन आय, व्यावसायिक लाभ, पेशेवर प्राप्तियां और बैंक निवेश से अर्जित ब्याज सहित विभिन्न राजस्व धाराओं का गहन अवलोकन प्रदान करता है। फॉर्म 26AS के भीतर की जानकारी नियोक्ता, कटौतीकर्ता, संग्रहकर्ता और वित्तीय संस्थानों जैसे टैक्स कटौती या संग्रह के लिए जिम्मेदार संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत टैक्स रिटर्न से निकाली जाती है। ये डिटेल तिमाही आधार पर इनकम टैक्स विभाग को रिपोर्ट किए जाते हैं। इसके अलावा फॉर्म 26AS रियल एस्टेट लेनदेन और आभासी संपत्ति लेनदेन से जुड़े टैक्स कटौती से संबंधित डेटा भी कैप्चर करता है।
सालाना आय डिटेल
सालाना इंफॉर्मेशन डिटेल ((AIS) टैक्सपेयर के वित्तीय डिटेल का एक व्यापक समरी है जैसा कि फॉर्म 26AS में प्रस्तुत किया गया है। इसमें स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस), स्रोत पर कर संग्रह (TDS), ब्याज, डिविडेंड, शेयर बाजार की गतिविधियों और म्यूचुअल फंड लेनदेन की जानकारी शामिल है। AIS फॉर्म 26AS में उपलब्ध जानकारी का विस्तार है, टैक्स कटौती, भुगतान और वित्तीय गतिविधियों का डिटेल जानकारी प्रदान करता है। टैक्सपेयर डाउनलोड प्रक्रिया शुरू करने से पहले यूजर्स आईडी के रूप में अपने पैन के साथ रजिस्ट्रेशन करके आयकर पोर्टल (incometax.gov.in) पर फॉर्म 26AS और AIS तक पहुंच सकते हैं।
