कई लोग यह समझ नहीं पाते कि माता-पिता के निधन के बाद जॉइंट बैंक अकाउंट से उनके बच्चों या दूसरे वारिसों के नाम ट्रांसफर हुई रकम पर इनकम टैक्स देना पड़ता है या नहीं। खासकर तब, जब बैंक अकाउंट ‘जॉइंट’ हो और उसमें काफी राशि जमा हो। ऐसे में मन में सवाल उठता है कि क्या यह रकम गिफ्ट मानी जाएगी या इनकम? या फिर इस पर कोई टैक्स देना होगा? आइए बताते हैं क्या है इनकम टैक्स का नियम।
टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर पिता के निधन के बाद आपको उनके जॉइंट अकाउंट की रकम मिलती है, तो इस पैसे को गिफ्ट नहीं माना जाता, बल्कि विरासत (Inheritance) के तौर पर देखा जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में अभी इन्हेरिटेंस टैक्स लागू नहीं है। इसलिए माता-पिता के निधन के बाद उनके जॉइंट अकाउंट से मिली राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। कहें तो पिता या माता के देहांत के बाद जो भी वैध वारिस को पैसा मिलता है, उस पर आयकर नहीं लगाया जाता। यह कानून सभी प्रकार की विरासत कैश, बैंक बैलेंस, FD, प्रॉपर्टी या सोना पर समान रूप से लागू होता है।
विरासत में मिली रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है, लेकिन इसके बाद अगर आप इस पैसे को कहीं निवेश करते हैं और उससे कोई कमाई होती है, तो उस कमाई पर टैक्स देना जरूरी होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि आप विरासत में मिली राशि से फिक्स्ड डिपॉजिट करवाते हैं, तो उस FD पर मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाएगा। इसी तरह, अगर आप इस राशि से शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं और बाद में उनकी कीमत बढ़ने पर आपको लाभ होता है, तो उस बढ़ी हुई रकम पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। यानी, मूल राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन उससे होने वाली हर तरह की आय आयकर नियमों के अनुसार टैक्स योग्य होती है।
अधिकतर जॉइंट अकाउंट्स में Either or Survivor सुविधा होती है, जिसका मतलब है कि दोनों अकाउंट होल्डर खाते को स्वतंत्र रूप से चला सकते हैं और पैसा निकाल सकते हैं। यदि किसी एक होल्डर का निधन हो जाए, तो दूसरा व्यक्ति बिना किसी अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया के खाते का पूर्ण मालिक बन जाता है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि परिवार को तुरंत आर्थिक सुविधा मिल जाती है और बैंक को भी रकम जारी करने में कोई देरी नहीं होती। यह नियम खासतौर पर पति-पत्नी, माता-पिता या बच्चों के साथ जॉइंट अकाउंट रखने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है।
अगर मृतक व्यक्ति ने वसीयत (Will) बनाई है, तो बैंक खाते की रकम का वितरण उसी वसीयत के अनुसार किया जाता है। लेकिन यदि वसीयत नहीं है, तो जॉइंट अकाउंट होने की स्थिति में पैसा सीधे Survivor के पास चला जाता है और किसी अन्य वारिस का उस पर तत्काल दावा नहीं बनता। हालांकि, यदि परिवार में विवाद हो या कोई वारिस आपत्ति करे, तो मामला सिविल कोर्ट तक जा सकता है, लेकिन बैंक के नजरिए से Survivor ही खाते का वैध मालिक माना जाता है।
अगर आपको यह राशि मिली है और आप उसे अपने बैंक खाते में जमा करते हैं, तो ITR में इसे Exempt Income के रूप में दिखाना एक समझदारी भरा कदम माना जाता है। यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन इससे भविष्य में टैक्स से जुड़े किसी भी तरह के भ्रम या नोटिस से बचने में आसानी होती है। कुल मिलाकर, माता-पिता के निधन के बाद जॉइंट अकाउंट से मिलने वाली रकम पर कोई टैक्स नहीं लगता क्योंकि यह आपकी विरासत मानी जाती है। हालांकि, यदि आप इस विरासत में मिली राशि को आगे निवेश करते हैं और उससे ब्याज या कैपिटल गेन जैसे लाभ कमाते हैं, तो उस आय पर टैक्स देना ज़रूरी होता है।
जॉइंट अकाउंट में Either or Survivor क्लॉज होना सबसे सुविधाजनक माना जाता है। यह परिवार को मुश्किल समय में आर्थिक तौर पर सुरक्षित रखता है और बैंकिंग प्रक्रिया भी बहुत आसान बनाता है। अगर आप भी अपने माता-पिता या जीवनसाथी के साथ जॉइंट अकाउंट चलाते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है और टैक्स से जुड़ी गलतफहमियों को दूर कर सकती है।