गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर यूनियन (Gig and Platform Service Workers Union) ने दावा किया है कि एलपीजी गैस की सप्लाई में आई समस्या के कारण फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं। यूनियन के अनुसार, Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म पर लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक फूड डिलीवरी ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं।
यूनियन का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में रुकावट के कारण कई रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन सामान्य तरीके से खाना तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जिसका सीधा असर डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स की कमाई पर पड़ रहा है।
श्रम मंत्रालय से आपात बैठक की मांग
यूनियन ने इस मामले को लेकर श्रम मंत्रालय से आपात बैठक बुलाने की मांग की है। इसके साथ ही एक पत्र भेजकर कई अहम मांगें भी रखी गई हैं। यूनियन का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो हजारों गिग वर्कर्स की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सरकार और कंपनियों से की गई मुख्य मांगें
यूनियन ने अपनी मांगों में कहा है कि तेल मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि फूड बिजनेस से जुड़े रेस्टोरेंट और किचन को 24 घंटे कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई मिलती रहे। इसके अलावा यूनियन ने यह भी मांग की है कि Zomato, Swiggy और अन्य फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म प्रभावित गिग वर्कर्स को तुरंत 10,000 रुपये की राहत राशि दें।
गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा और राहत की मांग
यूनियन ने यह भी मांग रखी है कि कम से कम तीन महीने तक डिलीवरी पार्टनर्स की आईडी डिएक्टिवेट न की जाए और उन्हें न्यूनतम दैनिक इंसेंटिव दिया जाए। साथ ही सभी गिग वर्कर्स को Code on Social Security, 2020 के तहत पूरी तरह से कवर करने की मांग भी की गई है, ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं मिल सकें।
संकट का असर गिग वर्कर्स की कमाई पर
यूनियन के मुताबिक, एलपीजी सप्लाई में रुकावट का सबसे ज्यादा असर गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर पड़ रहा है। ऑर्डर कम होने के कारण उनकी रोजाना की कमाई घट रही है। ऐसे में यूनियन ने सरकार और कंपनियों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है, ताकि फूड डिलीवरी सेवाएं सामान्य रूप से चल सकें और गिग वर्कर्स की आय प्रभावित न हो।
